Gridih News : गिरिडीह. स्कॉलर बीएड कॉलेज संस्थान के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में ‘21वीं सदी के शिक्षक के आवश्यक कौशल ” विषय पर एक दिवसीय मासिक शैक्षिक अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन किया गया. बौद्धिक विमर्श और नवीन दृष्टिकोणों से सजी इस संगोष्ठी में शिक्षा जगत की बदलती चुनौतियों और उनके समाधानों पर गहन मंथन हुआ. मुख्य वक्ता डॉ एके सिंह ने कहा कि 21वीं सदी का शिक्षक केवल सूचना प्रदाता नहीं, बल्कि ज्ञान का सुगमकर्ता है.
शिक्षकों को सतत अनलर्न और रीलर्न से गुजरना होगा :
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य वक्ता केएन बख्शी बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ अजीत कुमार सिंह एवं महाविद्यालय प्राचार्या डॉ शालिनी खोवाला ने किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज तकनीकी दक्षता, सहानुभूति और आलोचनात्मक सोच ही एक शिक्षक की असली पूंजी है. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षकों को निरंतर ”अनलर्न” और ”रीलर्न” की प्रक्रिया से गुजरना होगा. उन्होंने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर दिया. कहा कि आज के युग में शिक्षकों को क्रिटिकल थिंकिंग, तकनीकी दक्षता और संवेगात्मक बुद्धिमत्ता जैसे कौशलों से खुद को लैस करना होगा ताकि वे भविष्य की पीढ़ी की आकांक्षाओं पर खरे उतर सकें. संगोष्ठी का संचालन डॉ संतोष चौधरी एवं डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया. कार्यक्रम की सफलता में कॉलेज के शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मियों की सक्रिय सहभागिता रही.
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