Giridih News :जिले की नदी घाटों पर बालू माफिया का कब्जा, दिन-रात हो रहा अवैध उठाव

Giridih News :गिरिडीह जिले में अवैध बालू उठाव और तस्करी बेलगाम हो गया है. जिले की विभिन्न नदियों से बालू माफिया खुलेआम अवैध रूप से बालू का उठाव कर रहे हैं, लेकिन इस पर रोक लगाने में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं.

हालात ऐसे बन चुके हैं कि बालू तस्करों में ना तो कानून का डर दिखाई देता है और ना ही किसी तरह की कार्रवाई का भय. दिन के उजाले में जहां सड़कों पर बालू लदे ट्रैक्टर बेखौफ दौड़ते नजर आते हैं, वहीं रात के समय यह अवैध कारोबार और बढ़ जाता है. बताया जा रहा है कि जिले की कई नदियों से हर रात 50 से 100 ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध बालू उठाव किया जा रहा है। यह स्थिति प्रशासन की निष्क्रियता को साफ तौर पर उजागर करती है. रात के समय बालू माफिया पूरी तरह निश्चिंत रहते हैं, क्योंकि उन्हें यह भरोसा होता है कि ना तो कोई जांच होगी और ना ही किसी तरह की रोक-टोक.

पुलों के अस्तित्व पर भी संकट

इस अवैध कारोबार से जहां सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं नदियों के अस्तित्व पर भी गंभीर संकट गहराता जा रहा है. कई पुलों पर भी संकट मंडरा रहा है. बालू माफियो पुलों के पिलर के नीचे से भी बालू का उठाव कर रहे हैं. इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी से कई सवाल उठ रहे हैं. आम लोगों में यह चर्चा है कि आखिर प्रशासन कब नींद से जागेगा और बालू माफिया पर सख्त कार्रवाई करेगा.

नंबर प्लेट हटाकर दौड़ रहे ट्रैक्टर, हादसों का बढ़ रहा खतरा

बालू तस्करी को अंजाम देने के लिए तस्कर ट्रैक्टरों से जानबूझकर नंबर प्लेट हटा देते हैं. इससे वाहनों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और उनके मालिकों तक पहुंचना भी आसान नहीं रहता है. खासकर रात के समय बिना नंबर प्लेट वाले ओवरलोड ट्रैक्टर तेज रफ्तार में सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. कई बार जांच के दौरान जब ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया जाता है, तो चालक अंधेरे और सुनसान रास्तों का फायदा उठाकर फरार हो जाते हैं. हैरत की बात यह है कि संबंधित विभागों को इस पूरे खेल की जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है.

रात में बढ़ जाती है ढुलाई

शाम ढलते ही बालू तस्करी का नेटवर्क और अधिक सक्रिय हो जाता है. शाम होते ही नदी घाटों और संपर्क सड़कों पर ट्रैक्टरों व भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है. दिन की तुलना में रात में यह अवैध कारोबार बढ़ जाता है. बिना नंबर प्लेट के ओवरलोड वाहन और तेज गति से सड़कों पर दौड़ते हैं.

नदी घाटों पर पहले से तैनात रहते हैं मजदूर

बालू माफिया ने अवैध उठाव के लिए पूरी तरह संगठित व्यवस्था बना रखी है. नदी घाटों पर ट्रैक्टर पहुंचने से पहले ही मजदूर वहां तैनात रहते हैं. जैसे ही ट्रैक्टर नदी में उतरता है, मजदूर तुरंत बालू लोड करने में जुट जाते हैं. एक ट्रैक्टर के निकलते ही दूसरा ट्रैक्टर घाट में उतार दिया जाता है. इस व्यवस्था के चलते कुछ ही घंटों में दर्जनों ट्रैक्टर बालू से लादकर बाहर निकाल लिए जाते हैं.

इन घाटों से हो रहा सबसे ज्यादा अवैध उठाव

जिले के झरियागादी, शास्त्रीनगर, गरहाटांड़, कोरनाटांड़ बलखंजो घाट, बराकर नदी और उसरी नदी समेत कई इलाकों से बड़े पैमाने पर अवैध बालू उठाव किया जा रहा है. बिरनी, पीरटांड़, बेंगाबाद, गांवा सहित अन्य प्रखंडों में भी दिन-रात बालू की ढुलाई जारी है. पीरटांड़ प्रखंड के हरलाडीह ओपी और खुखरा थाना क्षेत्र से प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रैक्टर धनबाद जिला भेजे जाता है. वहीं, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कोरनाटांड़ घाट से प्रतिदिन 100-150 ट्रैक्टर बालू की ढुलाई हो रही है.

डीएमओ ने नहीं उठाया फोन

बालू तस्करी के मामले में गिरिडीह जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) सत्यजीत सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. इसके कारण विभागीय पक्ष सामने नहीं आ पाया, जिससे खनन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

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Author: PRADEEP KUMAR

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