तबीयत खराब होने पर सुनील को सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. इलाज के दौरान सदर उसकी मौत हो गयी थी. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था. परिजनों का कहना था कि अस्पताल पहुंचने के बाद सुनील को समय पर ऑक्सीजन नहीं दिया गया. साथ ही आइसीयू में बेड उपलब्ध होने के बावजूद उसे वहां नहीं रखा गया. इसके कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई और मौत हो गयी थी. हंगामे के कारण कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई थी.
पुलिस ने संभाली थी
स्थिति
सूचना मिलने पर नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया. पुलिस और अस्पताल प्रशासन के समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत हुआ. इस दौरान यह भी सामने आया कि मृतक पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित था और 10 दिन पर डायलिसिस करवाता था. अंततः मृतक के परिजनों ने पुलिस को एक लिखित आवेदन देकर कहा कि उसकी मौत पूर्व से चली आ रही बीमारी के कारण हुई है और वह किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाहते. इसके बाद परिजन शव को लेकर घर चले गये.
