बताया जाता है कि 27 नक्षत्रों में खेती के लिए रोहिणी नक्षत्र अत्यंत शुभ माना जाता है. इसमें किसानों द्वारा खेतों में की गई बुआई तथा तैयारी अच्छी बारिश और पैदावार का संकेत देती है. रोहिणी नक्षत्र में धान के बिचड़े डालने के लिए किसान पूर्व में भी खेतों की जुताई कर चुके हैं, जिससे खेतों के खर-पतवार नष्ट हो गये. धान के बीज डालने के लिए किसान पुनः खेतों की जुताई में लग गये.
व्यक्ति के आत्मविश्वास, भाग्योदय व प्रतिष्ठा पर पड़ता है असर : बाबूलाल पांडेय
इस संबंध में भगला काली मंदिर सरिया के पुजारी बाबूलाल पांडेय ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव के नक्षत्र परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. क्योंकि इसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के आत्मविश्वास, भाग्योदय और समाज में मिलने वाली प्रतिष्ठा पर पड़ता है. बताया कि 25 मई 2026 को सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. जो चंद्र देव के स्वामित्व वाला नक्षत्र और वृषभ राशि के अंतर्गत आता है. यह नक्षत्र सुख-सुविधा,आकर्षक और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस महत्वपूर्ण गोचर का प्रभाव मेष राशि से लेकर कन्या राशि तक के जातकों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा. कई लोगों के जीवन में नये अवसर और सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है. उन्होंने बताया कि रोहिणी नक्षत्र उत्तम खेती तथा किसानों के लिए वरदान माना जाता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के मुख्य देवता प्रजापति हैं. यह नक्षत्र सृजन, विकास और वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है. इस नक्षत्र में डाले गये बीज से उन्नत खेती के आसार बने रहते हैं.पहले नौ दिन को कहते हैं नौतपा, इसमें धरती तवे के समान गर्म हो जाती है
उन्होंने बताया कि रोहिणी नक्षत्र का पहला नौ दिन नौतपा के नाम से जाना जाता है. इस वक्त धरती पर सूरज की किरणें सीधे पड़ती हैं. धरती तवे के समान गर्म हो जाती है. नौतपा का यह दिन किसानों के लिए अच्छा माना जाता है. नौतपा दो जून को शेष होगा. इस दौरान किसान खरीफ फसल के लिए धान, मकई, मोटे अनाज, दलहन आदि खेतों में बोते हैं. रोहिणी नक्षत्र आज से शुरू हो रहा है, लेकिन, सरकार द्वारा अब तक किसानों को अनुदानित बीज वितरण की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. इससे किसान परेशान नजर आ रहे हैं.
