Giridih News :रंगयात्रा ने गिरिडीह में बिखेरी देश की सांस्कृतिक विविधता की छटा

Giridih News :अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक, शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य प्रतियोगिता के तीसरे दिन शनिवार को गिरिडीह शहर में देश की इंद्रधनुषी सांस्कृतिक आभा छायी रही.

इस दौरान विविधवर्णी वेशभूषा में कला की विविध विधाओं से संपन्न कलाकारों की झांकियों ने नगरवासियों का मन मोह लिया. कला संगम के तत्वावधान में सवेरा सिनेमा हॉल में स्व. उमारानी ताह की स्मृति में आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन का समापन रविवार को होगा.

देश की अभिनय कला से गिरिडीह हुआ रूबरू

रंगयात्रा के दौरान कलाकार व दल कतारबद्ध होकर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे. बिहू, मणिपुरी, ओडिशी, नागपुरी समेत विविध शास्त्रीय व लोक नृत्य मुग्धकारी दृश्य रच रहे थे. जैसे गिरिडीह में देश भर की कला एवं संस्कृति उतर आयी हो. ईश्वर स्मृति भवन से निकली रंगयात्रा मकतपुर, कालीबाड़ी, टावर चौक, मौलाना आजाद चौक, बड़ा चौक, गांधी चौक होते हुए जैन विद्यालय में समाप्त हुई. जैन विद्यालय के मैदान में छऊ नृत्य व, हुनर संस्थान आजमगढ़ ने लोक नृत्य पेश किया. यहां कार्यकारी अध्यक्ष पंकज ताह ने सभी कलाकारों का स्वागत किया

कला संगम के सरोकार की चतुर्दिक सराहना

25 वीं अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक, शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य प्रतियोगिता के तीसरे दिन शनिवार को नाटकों के मंचन, शास्त्रीय नृत्य एवं लोक नृत्य की प्रस्तुति के बीच कला संगम की स्मारिका ‘सर्जना’ का विमोचन किया गया. विमोचन सलूजा गोल्ड के चेयरमैन अमरजीत सिंह सलूजा, कला संगम के संरक्षक सह पूर्व मंत्री चंद्रमोहन प्रसाद, संरक्षक राजेंद्र बगड़िया, कोडरमा सांसद के प्रतिनिधि दिनेश यादव, अध्यक्ष प्रकाश सहाय, कार्यकारी अध्यक्ष पंकज ताह, सचिव सतीश कुंदन, स्मारिका सर्जना के प्रधान संपादक राकेश सिन्हा, संपादक सुनील मंथन शर्मा, गिरिडीह कॉलेज के प्रिंसिपल सह साहित्य प्रमुख अनुज कुमार, डॉ शैलेंद्र चौधरी, उपाध्यक्ष राजीव सिन्हा, कृष्ण कुमार सिन्हा, सह सचिव सुजय गुप्ता, शिवेंद्र सिन्हा, मदन मंजरवे, प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर सरदार देवेंद्र सिंह, सह संयोजक राजेश सिन्हा, सलाहकार विशाल आनंद, संगीत प्रमुख अरित चंद्रा, कार्यालय प्रभारी मनोज कुमार मुन्ना, आजीवन सदस्य कृष्णा बगड़िया आदि ने संयुक्त रूप से किया. सलूजा गोल्ड के चेयरमैन अमरजीत सलूजा ने कहा कि कला संगम कला एवं संस्कृति को संरक्षित कर रहा है, जो काफी सराहनीय है. पूर्व मंत्री चंद्रमोहन प्रसाद ने कला संगम के पूर्व की गतिविधियों की चर्चा की.

दिये गये स्व. दिगंबर प्रसाद नाट्यश्री एवं कला श्री सम्मान

स्मारिका के विमोचन से पूर्व स्व. दिगंबर प्रसाद की स्मृति में देशभर के नौ कलाकारों को नाट्यश्री एवं कला श्री सम्मान से सम्मानित किया गया. नाट्यश्री सम्मान असम के जयप्रकाश शर्मा व अमर शर्मा, जमशेदपुर के श्याम कुमार, ओडिशा के निहार रंजन मिश्रा, विश्वजीत साहू, जीवल महतो, सूरज खन्ना एवं कला श्री सम्मान गिरिडीह के सुनील लाभ एवं प्रीति भास्कर को दिया गया. मंच संचालन नीतीश आनंद ने किया. मौके पर निर्णायक शिवानी भट्टाचार्य, सरसी चंद्रा, वशिष्ठ प्रसाद सिन्हा, अशोक मानव, शिवलाल सागर, मो. निजाम, डॉ पुष्पा सिन्हा, डॉ तारकनाथ देव, संदीप सिन्हा, राजेंद्र तरवे, रविश आनंद, सुजाता कुमारी, शुभम, आकाश, विकास, सिद्धांत, सौरभ, क्रांति शाहा, अनिल चंद्रवंशी, इंद्रजीत मिश्रा, आकाश सहाय सहित सैकड़ों दर्शक उपस्थित थे.

भाषा शहीदों को समर्पित कबर नाटक का मंचन

प्रसिद्ध बांग्लादेशी नाटककार मुनीर चौधरी द्वारा रचित ऐतिहासिक व वैचारिक रूप से सशक्त एकांकी नाटक कबर का मंचन निशान जमशेदपुर ने किया. यह नाटक 21 फरवरी 1952 की ऐतिहासिक भाषा आंदोलन की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जब तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में बांग्ला भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए छात्रों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी. कबर उन अमर शहीदों के बलिदान को प्रतीकात्मक और मार्मिक शैली में प्रस्तुत करता है. इसके लेखक मुनीर चौधरी ने इसकी रचना 17 फरवरी 1953 को ढाका सेंट्रल जेल में अपने कारावास के दौरान की थी. 21 फरवरी 1953 को इस नाटक का प्रथम मंचन जेल के भीतर राजनीतिक बंदियों ने किया था. इसे यह दक्षिण एशिया में जेल रंगमंच का एक प्रारंभिक और ऐतिहासिक उदाहरण बन गया. कबर को पूर्वी बंगाल का पहला क्रांतिकारी नाटक माना जाता है. यह नाटक आज भी अपनी वैचारिक दृढ़ता, प्रतीकात्मक संरचना और संवेदनशील प्रस्तुति के कारण दर्शकों को भीतर तक झकझोर देता है.

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Author: PRADEEP KUMAR

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