हौसले को पहियों का सहारा मिले तो मंजिल की दूरी भी छोटी पड़ने लगती है. इसी जज्बे के साथ सीतामढ़ी से निकले रजनीश देविश इन दिनों स्केटिंग करते हुए भारत भ्रमण पर हैं. तीन अगस्त 2026 को मां सीता की धरती सीतामढ़ी से शुरू हुई उनकी ऑल इंडिया स्केटिंग यात्रा शुक्रवार को 25वें दिन गांडेय प्रखंड के बुद्धूडीह पहुंची. यहां शिक्षाविद् रामप्रसाद मंडल और स्थानीय ग्रामीणों ने रजनीश तथा उनके साथियों का स्वागत किया. इस दौरान रजनीश ने ग्रामीणों के साथ अपनी साहसिक यात्रा के अनुभव भी साझा किये.
अभियान के दौरान दो वर्षों तक घर से दूर रहेंगे
सीतामढ़ी जिले के हरिछपरा निवासी रजनीश देविश (पिता इंदल सिंह) ने करीब दो वर्षों तक घर से दूर रहकर स्केटिंग के जरिये पूरे भारत का भ्रमण करने का संकल्प लिया है. यात्रा के दौरान वे देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंचेंगे. इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव चार धाम और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना भी है.
आस्था और हौसले के साथ देश को जानने की कोशिश
रजनीश ने बताया कि वे पहले महाकुंभ, काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा कर चुके हैं. इस बार उनका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं है. वे भारत की विविध संस्कृति, परंपराओं, लोकजीवन और अलग-अलग राज्यों के लोगों को करीब से जानना चाहते हैं. उनका मानना है कि देश को समझने के लिए उसके गांवों, लोगों और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होना जरूरी है.
मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल, लोग आते गये, कारवां बनता गयार
जनीश ने बताया कि उन्होंने सीतामढ़ी से अकेले यात्रा शुरू की थी. बसतपुर (बिहार) में जयप्रकाश उनके साथ जुड़े. इसके बाद देवघर में साइकिल से भारत भ्रमण पर निकले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी मयंक मिले. बाबा नगरी देवघर से अब तीनों साथ-साथ आगे की यात्रा कर रहे हैं.
हर पड़ाव बन रहा यात्रा का किस्सा
यात्रा के दौरान मिलने वाले लोगों, स्थानीय संस्कृति, धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों और रोजमर्रा के अनुभवों को टीम वीडियो के रूप में रिकॉर्ड कर रही है. इन वीडियो को ‘Rajnish Devish’ नामक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया जा रहा है.
सपनों के लिए जोखिम उठाने की तत्परता जरूरी
रजनीश का कहना है कि इस अभियान का मकसद भारत भ्रमण के साथ सीतामढ़ी और बिहार का नाम देशभर में पहुंचाना तथा युवाओं को अपने सपनों के लिए जोखिम उठाने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करना भी है। स्केटिंग के पहियों पर जारी यह सफर अब आस्था, साहस और भारत की विविधता से जुड़ती एक अनूठी यात्रा बन गया है.
