वार्डवासियों ने कहा कि इलाके की सबसे गंभीर समस्या पेयजल की है, जिसने लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. स्थानीय लोगों ने बताया कि मोहल्ले में करीब दो वर्षों से पानी की घोर किल्लत बनी हुई है. स्थिति यह है कि पीने के पानी की तो बात ही छोड़िए, घर के दैनिक कार्यों के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. वार्ड में मौजूद सरकारी कुआं पूरी तरह सूख चुका है, वहीं एकमात्र तालाब भी अब सिर्फ नाम का पानी रह गया है. जलस्रोतों के सूख जाने से लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गयीं हैं. लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है या फिर दूर-दराज के मोहल्लों से पानी ढोकर लाना पड़ता है. गर्मी के इस भीषण मौसम में हालात और भी बदतर हो गये हैं. कई परिवारों के लिए पानी जुटाना रोजमर्रा की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.
पाइपलाइन बिछी, लेकिन नहीं मिला पानी
वार्डवासियों ने बताया कि इलाके में पाइपलाइन तो बिछायी गयी है, लेकिन उसमें पानी की आपूर्ति नहीं होती. कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों को लिखित और मौखिक रूप से इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. लोगों में प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी देखी गयी. लोगों ने प्रशासन से मांग की कि अविलंब स्थायी समाधान निकाला जाये, ताकि वार्डवासियों को पानी के लिए दर-दर भटकना न पड़े.नगर निगम क्षेत्र होते हुए भी बदहाल
इस वार्ड में सिर्फ पानी की समस्या ही नहीं, बल्कि नगर निगम की बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर भी गंभीर नाराजगी जतायी. स्थानीय निवासियों का कहना था कि कागजों में यह इलाका नगर निगम क्षेत्र में शामिल है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. मोहल्ले में नगर निगम की ओर से नियमित कचरा उठाव की कोई व्यवस्था नहीं है. सफाई के लिए कचरा उठाने वाली गाड़ी यहां तक नहीं पहुंचती, जिसके कारण लोग मजबूरी में खाली प्लॉट, सड़क किनारे या नालियों के आसपास कचरा फेंकना पड़ता है. इससे पूरे इलाके में गंदगी का अंबार लगा रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे के ढेर के कारण मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है. वार्डवासियों ने आरोप लगाया कि कई बार नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. ना तो नियमित सफाई होती है, ना ही कचरा प्रबंधन को लेकर कोई निगरानी व्यवस्था है. ऐसे में यह इलाका नगर निगम क्षेत्र में होकर भी ग्रामीण इलाकों से बदतर स्थिति में जीने को मजबूर है.
क्या कहते हैं वार्डवासी
हमारे मोहल्ले में दो साल से पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रहा है. सरकारी कुआं सूख गया है, तालाब में भी पानी काफी कम है. गरीब लोगों के लिए यह सबसे बड़ी परेशानी बन गयी है.
आशीष पासवान
पाइपलाइन बिछी हुई है, लेकिन उसमें आज तक पानी नहीं आया. सुबह से शाम तक पानी की जुगाड़ में ही समय निकल जाता है. दूसरे मोहल्ले से पानी लाने में महिलाओं को बहुत दिक्कत होती है.
संजय कुमार
यह इलाका नगर निगम में आता है, लेकिन यहां निगम जैसी कोई सुविधा नहीं है. कचरा उठाने के लिए गाड़ी तक नहीं आती. मजबूरी में लोग इधर-उधर कचरा फेंकते हैं. इससे बीमारी की आशंका बनी हुई है.
दीपक चौधरी
कई बार नगर निगम और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. ना पानी की समस्या का समाधान हुआ और ना सफाई का. इस मोहल्ले पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है.
