गांडेय और बेंगाबाद की सीमा पर स्थित रेलवे का चर्चित पंपू तालाब इन दिनों गंदगी और झाड़ियों से पट गया है. विभागीय स्तर पर साफ-सफाई नहीं होने और लगातार अनदेखी के कारण तालाब का अस्तित्व खतरे में है.
आसपास के कई गांवों के लिए है खास
जानकारी के अनुसार, आजादी से पहले निर्मित यह तालाब आसपास के बंधाबाद, महेशमुंडा, रघेडीह, बैदा डीह और बड़कीटांड़ समेत कई गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है. ग्रामीण यहां स्नान करने के अलावा विभिन्न पूजा-अनुष्ठानों के दौरान प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं. कभी इलाके की पहचान रहा यह तालाब अब बदहाली की तस्वीर बन गया है.
सफाई नहीं होने से घास और झाड़ियां उग आयीं
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोडरमा-गिरिडीह रेल लाइन के विस्तार के दौरान तालाब के एक हिस्से की भराई कर दी गयी. इसके बाद इसका क्षेत्रफल लगातार सिमटता गया. समय पर गाद की सफाई नहीं होने से तालाब में घास और झाड़ियां उग आयीं. जगह-जगह गंदगी जमा होने से इसकी स्थिति और खराब हो गयी है.
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सौंदर्यीकरण के नाम पर खानापूर्ति
ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि रेल विस्तार के दौरान तालाब की भराई का विरोध किया गया था. बाद में सौंदर्यीकरण के नाम पर खानापूर्ति की गयी, लेकिन गाद और गंदगी की समुचित सफाई नहीं हुई.
प्रशासन से सफाई की मांग
लोगों ने रेल प्रशासन से पंपू तालाब की तत्काल सफाई, गाद हटाने और समुचित सौंदर्यीकरण कराने की मांग की है, ताकि इस ऐतिहासिक जलस्रोत का अस्तित्व बचाया जा सके.
