Giridih News :धान लेने के बाद नहीं हो रही ऑनलाइन इंट्री, हजारों किसानों का भुगतान रुका

Giridih News :जिले में हजारों किसान मायूस हैं. इन किसानों से धान लेने के बाद उसकी ऑनलाइन इंट्री नहीं होने से भुगतान का मामला लटक गया है. बता दें कि सरकार ने किसानों से पैक्स के माध्यम से धान खरीदने की व्यवस्था की थी. 15 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक धान लेने का आदेश दिया गया था.

बताया जा रहा है कि काफी संख्या में किसानों ने अपने धान को पैक्स के गोदाम तक पहुंचा तो दिया, लेकिन उसकी ऑनलाइन इंट्री 31 मार्च तक ई-उपार्जन पोर्टल पर नहीं की जा सकी. 31 मार्च से पोर्टल बंद हो गया है. ऐसे में जहां हजारों क्विंटल अनाज विभिन्न पैक्सों में पड़े हुए हैं, वहीं हजारों किसान भुगतान को लेकर मायूस हैं. बताया जा रहा है कि बिचौलियों और पैक्स संचालकों की मिलीभगत के कारण किसानों का सीधे ऑनलाइन इंट्री नहीं हो सकी. कमीशनखोरी के कारण बिचौलियों को प्राथमिकता दी गयी और उनके माध्यम से पैक्स को दी गयी धान की इंट्री आसानी से कर ली गयी, जबकि किसान ऑनलाइन इंट्री के लिए 31 मार्च तक संबंधित पैक्सों का चक्कर काटते रह गये.

23 प्रतिशत किसान से ही लिया जा सका धान

मिली जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिले में कुल 18085 किसान निबंधित हैं, जिनसे 3.5 लाख क्विंटल धान का खरीदने का लक्ष्य निर्धारित था. लेकिन, मात्र 23 प्रतिशत किसान से ही धान लिया जा सका. बताया जाता है कि कई किसानों द्वारा सरकारी तंत्र में कई बाधाएं रहने के कारण बिचौलियों को धान बेच दिया गया. जबकि, कई किसान निर्धारित समय पर धान पहुंचा भी नहीं सके. ऐसे में मात्र 4185 किसान ही पैक्सों को धान देने में सफल रहे. लक्ष्य के विरुद्ध 77 प्रतिशत धान की खरीदी भी कर ली गयी और इन किसानों का ऑनलाइन इंट्री भी कर ली गयी है, जबकि अब भी डेढ़ से दो हजार किसानों का ऑनलाइन इंट्री नहीं हो पाया है.

किसानों का भुगतान लटकने की संभावना

बता दें कि यदि ऑनलाइन इंट्री के लिए सरकार ने समय का विस्तार नहीं दिया, तो किसानों का भुगतान लटक सकता है और ऐसे में किसान परेशानी में फंस सकते हैं. सरकारी आदेश के आलोक में ई-उपार्जन पोर्टल निर्धारित 31 मार्च तक खुला हुआ था. किसानों का कहना है कि यदि पैक्स को दिये गये धान की ऑनलाइन इंट्री नहीं हो सकी, तो उन्हें धान पैक्स गोदाम से लाने में काफी परेशानी होगी और उन्हें इसे औने-पौने दाम में बेचना भी पड़ सकता है. किसानों ने ई-उपार्जन पोर्टल फिर से खोलने की मांग सरकार से की है, ताकि पैक्स तक पहुंचाये गये धान की ऑनलाइन इंट्री हो सके और उनका भुगतान सुनिश्चित हो सके. किसानों का कहना है कि पैक्स प्रबंधकों और विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कारण ही ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. कहीं न कहीं रिलीज ऑर्डर विलंब से दिया जाना, मिल मालिकों द्वारा समय पर पैक्स गोदाम से धान का उठाव नही करना समेत अन्य कारणों से किसान फंस गये हैं.

सरकारी आदेश के आलोक में 31 मार्च तक हुई धान की खरीदी : डीएसओ

जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) गुलाम समदानी ने कहा कि किसानों से धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 मार्च तक ही निर्धारित थी. इसके बाद किसी भी पैक्स संचालक को धान किसानों से लेना नहीं चाहिए था. किन परिस्थितियों में पैक्स संचालकों ने धान की खरीदी की है, यह वे ही बता सकते हैं. बताया कि यदि सरकार के स्तर से ऑनलाइन इंट्री के लिए ई-उपार्जन पोर्टल नहीं खोला गया, तो किसानों का धान खरीदा नहीं जा सकता है और ना ही उनका भुगतान किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि गत वर्ष 15 दिनों का विस्तार देते हुए 15 अप्रैल तक पोर्टल को खोला गया था, जिसे बचे-खुचे किसानों से धान की खरीदी कर उन्हें भुगतान दे दिया गया था. यदि इस बार भी समय विस्तार, मिला तो किसानों को राहत होगी.

बेंगाबाद : किसानों का अटका ढाई हजार क्विंटल धान

बेंगाबाद के महुआर पैक्स में किसानों के जमा किया हुआ ढाई हजार क्विंटल धान ऑनलाइन पंजीकरण के अभाव में अटक गया है. अब ऑनलाइन पोर्टल भी बंद हो चुका है. ऐसे में पैक्स के गोदाम में धान जमा है और उसे राइस मिल भी नहीं भेजा जा सकता है. किसान पैक्स में धान देकर अब पछता रहे हैं. यदि पोर्टल नहीं खुलता है, तो किसानों को उसके धान की कीमत नहीं मिल पायेगी. साथ ही पैक्स से धान वापस लेने की विवशता रहेगी. जानकारी देते हुए पैक्स संचालक दिनेश कुमार का कहना है कि जैसे-जैसे धान पैक्स में आया, ऑनलाइन चढ़ाकर उसे राइस मिल में भेज दिया गया. लगभग 30 किसानों ने देर से धान दिया. राइस मिल से धान का ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उसे ऑनलाइन नहीं किया गया. फिलहाल ऑनलाइन पोर्टल 31 मार्च को बंद हो गया है. इसकी सूचना विभाग को दी गयी है. विभाग से पोर्टल खोलने की मांग को लेकर रांची कार्यालय में पत्राचार किया गया है. कहा है कि पोर्टल खुलने की संभावना है. जैसे ही पोर्टल खुलता है, किसानों का ऑनलाइन इंट्री करने के बाद राइस मिल में धान भेजा जायेगा, ताकि किसानों को भुगतान हो सके.

बगोदर : कई किसानों का नहीं हुआ भुगतान, परेशानी बढ़ी

बगोदर प्रखंड के धान अधिप्राप्ति केंद्रों में अभी भी धान पड़ा हुआ है. इससे पैक्स संचालक के साथ किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, ऑनलाइन करने की अवधि समाप्त होने के कारण कई किसानों का धान भी नहीं लिया जा रहा है. पैक्स संचालकों ने ऑनलाइन की तिथि को बढ़ाने की मांग की है, ताकि किसानों का बचा हुआ धान लिया जा सके. बता दें कि बगोदर प्रखंड के कुदर, मुंडरो, अटका पूर्वी, खेतको, दोंदलों, पोखरिया पैक्स में किसानों ने धान जमा किया है. लेकिन, अभी भी कई ऐसे किसान है जिनका धान लेने के बाद भी ऑनलाइन इंट्री नहीं हो पायी है. इससे पैक्स संचालक के साथ ही धान जमा किये किसानों को परेशानी हो रही है. मुंडरो पैक्स संचालक कालीचरण महतो ने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया बंद होने से धान पैक्स में जमा है. हालांकि. हमारे पैक्स से किसानों को भुगतान पूरी कर ली गयी है. लेकिन, ऑनलाइन की प्रक्रिया पूरी तरह से बंद है.

क्या कहते हैं किसान

दोंदलों पंचायत के किसान महादेव महतो, काली महतो, मालती देवी, बीना देवी, नेहा देवी, कुलेश्वरी देवी, रुकवा देवी, चंदन कुमार, दिदिया देवी, कौशल्या देवी जिनका ऑनलाइन तो किया गया है, लेकिन भुगतान नहीं हुआ है. किसानों का यह भी कहना है कि इससे तो बढ़िया था, हमलोग बिचौलिया के हाथों बेच दिये रहते. वहीं, दोंदलों पैक्स के प्रबंधक विकेश सिंह ने बताया कि कई किसानों ने सरकार के द्वारा ऑनलाइन बंद किये जाने से बाजारों के दुकानों में औने-पौने दाम में धान बेच दिये और पैक्स में धान देना नहीं चाहते हैं. साथ ही ऑनलाइन नहीं होने से किसानों का भुगतान रुका है.

जमुआ : 18 हजार क्विंटल धान का ऑनलाइन निबंधन फंसा

सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद जमुआ प्रखंड के नौ पैक्सों पर निर्भर किसानों और प्रबंधकों की चिंता बढ़ गयी है. प्रखंड के विभिन्न पैक्सों में वर्तमान में लगभग 18 हजार क्विंटल धान डंप पड़ा है, जिसकी अब तक ऑनलाइन एंट्री नहीं हो सकी है. किसानों ने अपनी मेहनत की फसल इस उम्मीद में पैक्सों को सौंपी थी कि उन्हें उचित सरकारी मूल्य मिलेगा. हालांकि, तकनीकी दिक्कतों या समय की कमी के कारण एक बड़ी खेप का पोर्टल पर ऑनलाइन नहीं हो पायी. अब पोर्टल बंद होने से इस धान की खरीद और भुगतान की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है. जमुआ के पैक्स प्रबंधकों ने सरकार और संबंधित विभाग से ऑनलाइन निबंधन की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है. जिला पैक्स संघ अध्यक्ष केदार प्रसाद यादव का कहना है कि अगर समय नहीं बढ़ाया गया, तो पैक्सों में पड़ा धान खराब हो सकता है. हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा. किसान रामानंद पांडेय, बासुदेव महतो, शेखावत मियां, फागू महतो आदि ने कहा कि हमलोग समय पर धान पैक्स में जमा कर दिये हैं. वहां, ऑफलाइन रसीद भी मिली, लेकिन धान प्राप्ति ऑनलाइन नहीं हुई है.

कहां कितना है धान का स्टॉक

प्रतापपुर पैक्स चुंगलो में पांच हजार, चित्तरडीह पैक्स में सात सौ क्विंटल, भंडारों पैक्स में नौ सौ क्विंटल, मलुवाटांड़ में पांच सौ क्विंटल, कुरहोबिंदो पैक्स में पांच सौ क्विंटल, चोरगता पैक्स में पांच सौ क्विंटल, लताकी पैक्स में पांच सौ क्विंटल धान फंसा हुआ है. प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी मदन मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रखंड के मात्र नौ धान अधिप्राप्ति केंद्र खुले थे, जिसमें पैक्स प्रबंधक व पैक्स प्रबंधक संबंधित जनसेवक की बायोमीट्रिक सिस्टम से धान ऑनलाइन की जा रही थी. कहा कि किसानों के धान को ऑनलाइन करने के समय विस्तार होने की संभावना है.

तिसरी : ऑफलाइन लिये गये दो दर्जन से अधिक किसानों के धान, नहीं हुआ भुगतान

तिसरी प्रखंड के लोकाई व गुमगी स्थित पैक्स में धान खरीदी की ऑनलाइन इंट्री के बंद होने से और कुछ किसानों का धान ऑफइलान जमा कर दिया. ऐसे दो दर्जन से अधिक किसानों का भुगतान नहीं हो पाया है. इससे किसान परेशान हैं. किसान धान खरीदी की ऑनलाइन इंट्री होने की आस में हैं. तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित तिसरी पैक्स और खिजुरी पैक्स को सेंटर नहीं दिया गया है, इस कारण दोनों पैक्स बंद रहता है, लेकिन प्रखंड के गुमगी और लोकाई पैक्स को धान खरीदी का सेंटर तो बनाया गया है, लेकिन ऑनलाइन इंट्री बंद होने के कारण उक्त दोनों पैक्स भी बंद हैं. किसानों से धान की खरीदारी बंद हो गयी है. लोकाई पैक्स केप्रबंधक नवीन कुमार ने बताया कि इस बार लोकाय पैक्स में 52 किसानों से 3520 क्विंटल 16 किलो धान की खरीदी गयी है. इसकी कीमत लगभग 86 लाख 24000 रुपए होगी. उन्होंने कहा कि इसमें लगभग सभी का ऑनलाइन इंट्री भी हो गयी है और आधे से अधिक किसानों का भुगतान भी हो गया है, लेकिन 19 किसानों का लगभग 35 लाख 24 हजार रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है और उम्मीद की जा रही है कि आठ दस दिनों में उनकी राशि का भुगतान हो जायेगा. उन्होंने कहा कि कुछ जो ऑफ लाइन धान पैक्स में दिये हैं, वैसे किसानों के लिए परेशानी बढ़ गयी है. जब तक उनकी ऑनलाइन इंट्री नहीं हो जाती है, तब तक राशि का भुगतान नहीं हो पायेगा और वेसी स्थिति में फिर किसानों को उनके धान वापस करना होगा. गुमगी पैक्स में चार किसानों द्वारा लगभग 29 लाख रुपए की धान ऑफलाइन खरीदारी की गयी है, जिसमें खिरोद्द के जयप्रकाश यादव से 25 क्विंटल, खिरोधर यादव से 36 क्विंटल, सेरुआ के सुरेंद्र यादव से लगभग 39 क्विंटल व मनोज यादव से 16 क्विंटल धान की ऑफलाइन खरीदारी की गयी है. जब तक इनका ऑनलाइन इंट्री नहीं होती है, तब तक इन चार किसानों को राशि का भुगतान नहीं हो सकता है. गुमगी पैक्स के प्रबंधक पिंटू साव ने बताया कि हर बार 15 दिनों का विस्तार मिलता है. इस बार भी इसी उम्मीद से किसानों से ऑफलाइन धान लिया गया है, लेकिन यदि ऑनलाइन चालू नहीं हुआ तो किसानों को धान वापस कर दिया जायेगा.

गांडेय : पैक्स प्रबंधक के साथ कृषक भी परेशान

31 मार्च से धान क्रय केंद्र में धान खरीद की ऑनलाइन इंट्री बंद होने से ऑफलाइन धान बिक्री करने वाले कृषक से लेकर पैक्स प्रबंधक भी परेशान हैं. पैक्स में धान देने के लिए किसान सुबह-शाम पैक्स का चक्कर लगा रहे हैं. जानकारी के अनुसार धान क्रय के तहत केंद्रांश बंद होने के बाद पिछले 31 मार्च से ऑनलाइन इंट्री बंद हो गयी है. बुधूडीह पैक्स प्रबंधक राजेश वर्मा ने बताया कि कुछ किसानों ने ऑफलाइन धान दिया है, लेकिन ऑनलाइन इंट्री बंद होने से सभी परेशान हैं. इतना ही नहीं प्रतिदिन सुबह-शाम अन्य कृषक धान देने पहुंच रहे हैं. बुधूडीह धान क्रय केंद्र में ऑफलाइन धान देने वाले मंझलाडीह के अबुल कलाम, पहरमा के भोला पंडित, धरधरवा के संतोष वर्मा आदि ने बताया कि ऑनलाइन इंट्री नहीं होने से भुगतान अटक गया है. दासडीह पैक्स प्रबंधक महेंद्र वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन इंट्री बंद होने से किसान परेशान हैं और धान देने के लिए रोज पैक्स का चक्कर लगा रहे हैं.

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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