Giridih News :केवलज्ञान आत्मा की पूर्ण जागृत अवस्था है : प्रमाण सागर

Giridih News :गुणायतन परिसर में सोमवार से सिंगापुर और मलेशिया से आये श्रावकों की उपस्थिति में सिंगापुर में निर्मित जिनालय में चौबीसी विराजमान करने के लिए जिनबिंबों की प्रतिष्ठा महोत्सव का शुरुआत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के ससंघ के सानिध्य में होगा.

कार्यक्रम की जानकारी गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी. उन्होंने बताया कि सोमवार को प्रातः 5:45 बजे मंगलाष्टक के साथ ध्वजारोहण, पात्र शुद्धि, मंडप शुद्धि व गर्भ कल्याणक की विधियों के साथ कार्यक्रम शुरू होगा. वहीं, रविवार की दोपहर आयोजित आराधना सार ग्रंथ की कक्षा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने निश्चय आराधना के महत्व पर प्रकाश डाला. मुनि श्री ने कहा कि निश्चय आराधना से ही केवलज्ञान की प्राप्ति संभव है. केवलज्ञान आत्मा की पूर्ण जागृत अवस्था है, जो बाह्य साधनों से नहीं, बल्कि आत्मानुभूति और आंतरिक शुद्धि से प्राप्त होती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि साधक जब निश्चय आराधना में स्थित होता है, तब अज्ञान का अंधकार समाप्त होकर आत्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है.

मोक्ष का आधार बाह्य आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक साधना है

मोक्ष का आधार बाह्य आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक साधना है. किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए उपादान, निमित्त और काल तीनों का समन्वय आवश्यक है. जैसे बीज को वृक्ष बनने के लिए उसकी क्षमता, जल-मिट्टी और समय की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार आत्मा की मुक्ति के लिए शुद्ध परिणाम, साधना और उपयुक्त काल का संगम जरूरी है.

विदेश में धर्म पालन के बताये उपाय

संध्याकालीन शंका समाधान सत्र में सिंगापुर और मलेशिया से आये श्रावकों ने विदेश में जिनालय के प्रभावी उपयोग के उपाय पूछे. इस पर मुनि श्री ने सुझाव दिया कि यदि मंदिर दूर हो तो घर-घर नियमित पूजन व स्वाध्याय प्रारंभ किया जाये तथा सप्ताह में कम से कम एक दिन सामूहिक अभिषेक और पूजा की जाये. उन्होंने महिलाओं की सक्रिय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भक्ति मंडलियों के माध्यम से भजन-स्तवन, मासिक सामूहिक प्रतिक्रमण और स्वाध्याय कार्यक्रम संचालित किए जायें. बच्चों को णमोकार मंत्र, पंच परमेष्ठी व तीर्थंकरों का परिचय अवश्य कराया जाये.

धर्म से बढ़ती है मानसिक शांति और व्यापार

मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक वातावरण से मानसिक शांति मिलती है और शांत मन से लिये गये निर्णय जीवन व व्यवसाय दोनों में सफलता दिलाते हैं. उन्होंने व्यापार में सत्य, विनय और विश्वास बनाये रखने, कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करने तथा लाभ का एक अंश धर्म तथा सेवा कार्यों में लगाने की प्रेरणा दी. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रतिदिन व्यापार आरंभ करने से पूर्व णमोकार मंत्र का जाप करने से स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ता है.

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Published by: Pradeep kumar

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