गिरिडीह. 11 सितंबर 2005 को भेलवाघाटी में हुई हिंसक घटना में मारे गये लोगों की याद में शुक्रवार की देर रात जलसा-ए-पाक सह शहीद-ए-आजम कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. तालीम-ए-बेदारी भेलवाघाटी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश कर उनकी शहादत को याद किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए.
घटना को बताया इतिहास की काली रात
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उलेमा हजरत मौलाना नजरुल हसन हासमी, मुबारक हुसैन मुबारक, शमीम फैजी और जुनैद जामी समेत अन्य उलेमा-ए-इकराम ने 11 सितंबर 2005 की घटना को याद किया. वक्ताओं ने कहा कि भेलवाघाटी में हुई घटना क्षेत्र के इतिहास की काली रात के रूप में दर्ज है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कई लोगों ने अपनी जान गंवायी. ऐसी घटनाओं को भुलाया नहीं जाना चाहिए और आने वाली पीढ़ी को भी क्षेत्र के इतिहास से अवगत कराया जाना चाहिए.
बच्चों की शिक्षा पर दिया जोर
कांफ्रेंस में वक्ताओं ने समाज के विकास और बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने और उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने की अपील की. वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.
पीड़ित परिवारों के लिए स्थायी समाधान की मांग
झामुमो नेता कासिम अंसारी ने कहा कि भेलवाघाटी की घटना क्षेत्र के इतिहास में काली रात के रूप में दर्ज है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से किये गये प्रयास अब भी पर्याप्त नहीं हैं. पीड़ित परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान किये जाने की जरूरत है.
कई लोगों ने निभायी आयोजन में भूमिका
कार्यक्रम की अध्यक्षता रिजवान अहमद जीआई ने की. आयोजन को सफल बनाने में सरफराज अंसारी, दिलबर अंसारी, उसमान अंसारी, भोला मियां समेत कई लोगों ने भूमिका निभायी. कार्यक्रम के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया.
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