मुनि श्री ने 25 मई को देशव्यापी मौन रैली एवं राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान चलाने का आह्वान किया. साथ ही कहा कि साधु-संतों की सुरक्षा केवल किसी एक समाज का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की आस्था और संवेदना का विषय है. उन्होंने मधुबन से प्रारंभ हुए इस अभियान को राष्ट्रीय स्वरूप देने का आह्वान करते हुए समाज से एकजुट होकर संत सुरक्षा हेतु आगे आने की अपील की.
आर्यिका संघ के साथ दुर्घटना सामान्य नहीं
इस दौरान उन्होंने कहा कि अब केवल शोक और संवेदनाएं व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को संगठित होकर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा. संत सुरक्षित होंगे तभी धर्म सुरक्षित रहेगा. उन्होंने चैनल के लाइव कार्यक्रम में फुटेज के हवाले से कहा कि सड़क के किनारे पैदल चल रही आर्यिका संघ को जिस प्रकार एक कार रौंदते हुए निकल जाती है, यह कोई सामान्य घटना नहीं है. यदि आज समाज जागरूक हो गया तो ऐसी घटनाओं पर विराम लगाकर इतिहास बनेगा, अन्यथा केवल ज्ञापन देकर बैठ जाने से पुनः ऐसी घटनाएं होती रहेंगी.
संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग
उन्होंने स्पष्ट कहा कि साधु-संत किसी जाति, वर्ग या संप्रदाय के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के होते हैं. इसलिए राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान में दिगंबर, श्वेतांबर, तेरापंथी, बीसपंथी सहित सभी समाजों एवं संत भक्तों को एकजुट होकर सहभागी बनना चाहिए. उन्होंने 25 मई सोमवार को प्रातः आठ बजे देशभर में मौन रैली एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक गांव, नगर एवं महानगर में समाज जन स्वप्रेरणा से शांतिपूर्ण रैली निकालें तथा प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग करें.
पैदल चलने वाले असुरक्षित
मुनि श्री ने कहा कि सरकार को पैदल विहार करनेवाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष नीति बनानी चाहिए. बड़े शहरों में सुरक्षित फुटपाथ व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने तथा पैदल यात्रियों की सुरक्षा हेतु ठोस कदम उठाये जाने आवश्यक हैं. उन्होंने कहा कि पैदल चलनेवालों का जीवन असुरक्षित बना हुआ है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अभियान की सामग्री का ज्ञापन मसौदा, पोस्टर, बैनर आदि उपलब्ध कराने की जानकारी देते हुए समाज के युवाओं से इसे अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया. उक्त जानकारी गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी.
