गिरिडीह. धनवार प्रखंड की दक्षिणी डोरंडा पंचायत के सबलाडीह निवासी प्रवासी मजदूर मुन्ना कुमार पांडेय की हरियाणा में बिजली का करंट लगने से मौत हो गयी. हादसा 18 सितंबर की रात ओल्ड फरीदाबाद के एसजीएम नगर में हुआ. मुन्ना मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे. हादसे की सूचना गांव पहुंचते ही परिवार में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
परिजनों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मुन्ना पांडेय का पार्थिव शरीर हरियाणा से पैतृक गांव सबलाडीह लाकर अंतिम संस्कार कराने की है. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बतायी जा रही है. ऐसे में शव को गांव तक लाने में होने वाले खर्च का इंतजाम करना परिजनों के लिए मुश्किल हो रहा है. परिवार की ओर से लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की गयी है.
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रोजी-रोटी के लिए गया था हरियाणा
परिजनों के अनुसार, मुन्ना कुमार पांडेय मजदूरी कर अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते थे. रोजगार के सिलसिले में वह हरियाणा गये थे. वहीं काम के दौरान करंट की चपेट में आने से उनकी मौत हो गयी.
हादसे की जानकारी मिलने के बाद गांव में शोक का माहौल है. ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के सामने एक ओर कमाऊ सदस्य को खोने का दुख है, तो दूसरी ओर शव को घर लाने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की चिंता है.
शव गांव लाने के लिए आर्थिक सहयोग की अपील
परिजनों और ग्रामीणों ने लोगों से अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग करने की अपील की है. उनका कहना है कि इस कठिन समय में छोटी-सी मदद भी परिवार के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
इधर सूचना मिलने के बाद झारखंड एकता संघ से जुड़े लोगों ने भी परिवार की मदद के लिए पहल की है. कोलकाता में कार्यरत संघ के अधिकारी अशोक कुमार वर्मा की पहल पर दिल्ली संघ के महासचिव सुनील कुमार की ओर से 11 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करायी गयी है. हालांकि, परिजनों के अनुसार शव को गांव तक लाने और अन्य जरूरी खर्चों के लिए अभी और आर्थिक मदद की आवश्यकता है.
स्थानीय रोजगार का मुद्दा उठा
मुन्ना पांडेय की मौत के बाद ग्रामीणों ने धनवार और गिरिडीह जिले से होने वाले मजदूरों के पलायन तथा स्थानीय रोजगार के अवसरों को लेकर चिंता जतायी है. ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में जाते हैं. दूसरे प्रदेशों में काम के दौरान हादसा होने पर परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करना पड़ता है.
ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने, सिंचाई व्यवस्था बेहतर करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की जरूरत बतायी. उनका कहना है कि गांव-कस्बों में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध होने से मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए दूर राज्यों में जाने की मजबूरी कम हो सकती है.
ग्रामीणों में अशोक वर्मा, मुन्ना कुशवाहा, शिवशरण कुशवाहा, मंडल अध्यक्ष राजू पांडेय, सुनीता विश्वकर्मा सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से भी ऐसे परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.
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