झारखंड ग्रामीण मजदूर सभा (झामस) के बैनर तले शुक्रवार को देशव्यापी कार्यक्रम के तहत सरिया प्रखंड मुख्यालय के समक्ष गरीब, मजदूर, भूमिहीन, आदिवासी और अन्य वंचित तबकों की विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता पवन महतो और संचालन धानेश्वर पासवान ने किया.
सरकार की नीतियों पर उठाये सवाल
धरना को संबोधित करते हुए झामस के महासचिव सीताराम सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के कारण गरीब, मजदूर, भूमिहीन और वंचित वर्ग लगातार समस्याओं का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों और मजदूरों के हितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए. झामस गरीबों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई को आगे भी मजबूती से जारी रखेगा.
भूमिहीनों को जमीन और आवास देने की मांग
धरना के दौरान संगठन की ओर से मांग की गयी कि जहां गरीब परिवार वर्षों से बसे हुए हैं, उन्हें पीपी एक्ट 1947 के तहत बासगीत पर्चा दिया जाये. साथ ही सभी भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध करायी जाये. प्रत्येक पंचायत में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी का निर्माण करने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की भी मांग उठायी गयी. जमीन के मालिकाना हक की शर्त वापस लेने की मांग भी की गयी.
राशन कार्ड और न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा उठाया
वक्ताओं ने जनवितरण प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए राशन सूची से जरूरतमंदों के नाम हटाने के निर्णय को वापस लेने और सभी पात्र परिवारों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने की मांग की. इसके अलावा कुशल मजदूरों के लिए 700 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने की मांग भी उठायी गयी.
खनन संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग
धरना के दौरान केंद्र सरकार से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक को अविलंब वापस लेने की मांग भी की गयी. वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक खनिज संपदा वाले राज्यों और स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ है.
धरना में माले के जिला कमेटी सदस्य सोनू पांडेय, गोविंद महतो, केदार मंडल, रामजी राणा, रेणु रवानी, महेंद्र पंडित, संजय यादव, राहुल मंडल, श्यामसुंदर यादव सहित बड़ी संख्या में झामस कार्यकर्ता और ग्रामीण मजदूर उपस्थित थे.
