कल्पना सोरेन लड़ेंगी गांडेय विधानसभा उपचुनाव, हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद से राजनीति में हैं सक्रिय

कल्पना सोरेन झामुमो के टिकट पर गांडेय विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगी. हेमंत सोरेन की पत्नी 29 अप्रैल को नामांकन दाखिल करेंगी, ऐसा गिरिडीह के जिला अध्यक्ष ने कहा है.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन अब विधानसभा का उपचुनाव लड़ने जा रहीं हैं. जी हां, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि गांडेय से कल्पना मुर्मू सोरेन ही चुनाव लड़ेंगीं.

कल्पना सोरेन को झामुमो ने अधिकृत रूप से घोषित किया प्रत्याशी

कल्पना सोरेन लगातार गांडेय का दौरा कर रहीं थीं. इससे यह स्पष्ट था कि हेमंत सोरेन की धर्मपत्नी ही यहां से विधानसभा का उपचुनाव लड़ेंगीं, लेकिन उनके नाम की घोषणा अब तक नहीं हुई थी. लेकिन, अब पार्टी ने आधिकारिक रूप से उनको अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गांडेय से दिलीप वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है. मुख्य विपक्षी पार्टी ने 29 मार्च को ही उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी.

29 अप्रैल को उपचुनाव के लिए नामांकन करेंगी कल्पना मुर्मू सोरेन

कल्पना सोरेन की उम्मीदवारी की घोषणा से पहले ही गिरिडीह के झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने उनके नामांकन की तैयारी भी शुरू कर दी थी. उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि 29 अप्रैल को कल्पना मुर्मू सोरेन गांडेय विधानसभा से परचा दाखिल करेंगी. उस दिन पपरवाटांड़ फुटबॉल मैदान में चुनावी सभा होगी, जिसमें मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन समेत झामुमो, कांग्रेस और राजद के बड़े नेता शामिल होंगे.

20 मई को गांडेय विधानसभा सीट पर होना है उपचुनाव

गांडेय विधानसभा सीट पर 20 मई को उपचुनाव होना है. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने 16 मार्च को ही गांडेय में विधानसभा के उपचुनाव की तारीख की घोषणा कर दी थी. बता दें कि गांडेय के विधायक सरफराज अहमद के इस्तीफे से यह सीट रिक्त हुई थी. सरफराज अहमद ने उस वक्त इस्तीफा दिया था, जब कथित जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की अटकलें तेज थीं.

विधायक के पद से सरफराज खान ने दिया था इस्तीफा

उसी दौरान सरफराज अहमद ने इस्तीफा दिया और इस बात की चर्चा तेज हो गई थी कि अगर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने हेमंत सोरेन को कथित जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार किया, तो कल्पना सोरेन अपने पति की जगह झारखंड की मुख्यमंत्री बनेंगी. लेकिन, सोरेन परिवार में ही इसका विरोध शुरू हो गया. बसंत सोरेन ने खुलकर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन शिबू सोरेन की बड़ी बहू और झामुमो के दिवंगत नेता दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन ने इसका विरोध किया. इसके बाद कल्पना को सीएम बनाने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

गांडेय के पूर्व विधायक सरफराज को झामुमो ने भेजा राज्यसभा

बता दें कि बाद में गांडेय के पूर्व विधायक सरफराज अहमद को झामुमो ने राज्यसभा का टिकट दिया. सरफराज अहमद निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुन लिए गए. ईडी ने जब हेमंत सोरेन को 31 जनवरी को गिरफ्तार किया, तो उसके बाद कल्पना सोरेन की राजनीति में सक्रियता काफी बढ़ गई. हाल ही में राजधानी रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित उलगुलान न्याय महारैली की कमान कल्पना ने अपने हाथों में ले ली थी.

कल्पना सोरेन के हाथों में थी उलगुलान न्याय महारैली की कमान

रांची के प्रभात तारा मैदान में 21 अप्रैल को हुई इस सफल रैली में मोदी विरोधी गठबंधन I.N.D.I.A. के कई बड़े नेता शामिल हुए. कल्पना सोरेन ने इन सभी नेताओं को खुद फोन करके महारैली में शामिल होने के लिए रांची आने का आमंत्रण दिया था. उनकी पहल पर ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य व अन्य नेता रांची आए थे.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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