मॉनसून की दस्तक के साथ ही जहां किसानों के चेहरे पर खुशी होनी चाहिए थी, पर डीजल की किल्लत ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. जमुआ प्रखंड और आसपास के इलाकों में पेट्रोल पंपों से डीजल नहीं मिलने के कारण किसान खरीफ फसलों धान, मक्का आदि की बुआई नहीं कर पा रहे हैं. खेतों को तैयार करने के लिए ट्रैक्टर खड़े हैं और बीज धरे के धरे रह गये हैं.
मेहनत पर पानी फिरने का अंदेशा
ईंधन संकट के मद्देनजर बाटी गांव के किसानों सिकंदर वर्मा, प्रकाश वर्मा, विकास वर्मा, सीताराम वर्मा, महादेव महतो, बृजकिशोर महतो, भुनेश्वर महतो आदि ने कहा कि सुबह से ही डिब्बा लेकर पंपों के चक्कर काट रहे हैं, पर वहां डीजल नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया जा रहा है. कुछ जगहों पर मिल भी रहा है तो लंबी कतारें हैं और ब्लैक में दिया जा रहा है. बिना डीजल के ट्रैक्टर कैसे चलेंगे. यही हाल रहा तो पूरी मेहनत पर पानी फिर जायेगा. किसानों ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से कृषि कार्य के लिए किसानों का विशेष डीजल कोटा निर्धारित करने की गुहार लगायी है. खड़े हैं ट्रैक्टर, समय पर बुआई नहीं होने का डर :स्थानीय किसानों का कहना है कि खरीफ फसल का यह समय बेहद नाजुक होता है. सही समय पर खेतों की जुताई कर बीज नहीं डाले गये, तो पूरी खेती प्रभावित हो जायेगी.
