Giridih News :मॉडल विद्यालय गावां के चार शिक्षक पढ़ा रहे वर्ग छठी से 12वीं तक के बच्चों को

झारखंड के पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से मॉडल विद्यालय की स्थापना की गयी. जैक के तहत अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई देने की यहां व्यवस्था है. ऑनलाइन आवेदन के उपरांत नामांकन की प्रक्रिया चलती है. गावां में भी मॉडल विद्यालय बना, लेकिन इस विद्यालय में सुविधाओं का घोर अभाव है.

विद्यालय प्रखंड मुख्यालय से लगभग तीन किमी की दूरी पर कस्तूरबा विद्यालय के पीछे स्थित है. विद्यालय में शिक्षकों का काफी कमी है. वहीं, पेयजल की सुविधा नहीं के बराबर है. विद्यालय में पहुंच पथ की स्थिति भी दयनीय है. विद्यालय में कक्षा छह से 12 तक में 243 विद्यार्थी नामांकित हैं. जबकि, शिक्षकों की संख्या मात्र चार है. विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

प्लस टू में हैं एक शिक्षक

प्लस टू में विज्ञान व कला दोनों संकायों में विद्यार्थी नामांकित हैं. प्लस टू के लिए यहां मात्र एक शिक्षक भूदेव मेथी कार्यरत हैं. उन्हें विद्यालय के प्रधानाध्यापक का भी प्रभार मिला हुआ है. श्री मेथी गणित पढ़ाते हैं. शेष विषयों की पढ़ाई भगवान भरोसे है. इसी प्रकार कक्षा छह से दस तक के अध्यापन की जिम्मेवारी मात्र तीन शिक्षकों पर है. विद्यालय में हिंदी, सोशल साइंस, संस्कृत समेत अन्य विषयों के एक भी शिक्षक नहीं हैं.

घर से पानी लेकर आते हैं बच्चे

विद्यालय परिसर में मात्र एक चापाकल है, जिसका पानी पीने लायक नहीं है. मध्याह्न भोजन बनाने में इस पानी का प्रयोग कपड़े से छान कर किया जाता है. गर्मी में चापाकल से पानी निकलना बंद हो जाता है. माल्डा तक पेयजलापूर्ति का पाइपलाइन बिछी है, लेकिन विद्यालय में कनेक्शन नहीं देने के कारण जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. विद्यालय के बच्चे पीने का पानी अपने घर से बोतल में लेकर आते हैं. सबसे अधिक परेशानी शौचालय में होती है, क्योंकि रनिंग वाटर की व्यवस्था नहीं रहने के कारण इसकी साफ सफाई करना संभव नहीं हो पाता है. विद्यालय के पहुंच पथ की स्थिति भी अच्छी नहीं है. विद्यालय में चहारदीवारी नहीं रहने के कारण छुट्टी के बाद परिसर असुरक्षित हो जाता है.

लोगों ने कहा

विद्यालय में शिक्षकों की कमी व जल की समस्या को ले बैठक में प्रस्ताव लेकर विभाग को भेजा गया है. व्यक्तिगत खर्च से एक चापाकल की व्यवस्था की गयी, लेकिन उसका पानी भी पीने लायक नहीं है. विभाग को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए.

जितेंद्र पांडेय, विप्रस अध्यक्ष

मॉडल विद्यालय की स्थिति काफी खराब है. बेहतर शिक्षा देने के लिए मॉडल विद्यालय की स्थापना की गयी है, लेकिन यह उद्देश्य पूरा करने में विफल सिद्ध हो रहा है. विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति पर विभाग को ध्यान देना चाहिए.

बैजनाथ प्रसाद यादव, पूर्व जिप सदस्य

क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक

विद्यालय के प्रधानाध्यापक भूदेव मेथी ने कहा कि सीमित संसाधनों व शिक्षकों में भी बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है. पेयजल का नहीं होना एक बड़ी समस्या है. जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए.

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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