इधर, हड़ताल का असर मनरेगा कार्यों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है. नयी योजनाओं के चयन से लेकर पुरानी योजनाओं का जियो टैग ठप पड़ गया है. मनरेगा से निबंधित मजदूरों को मजदूरी देने का दावा सिफर साबित हो रहा है. चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्य में मानव दिवस सृजन की प्रगति रिपोर्ट लगभग दस प्रतिशत में अटक गयी है.
समीक्षा बैठक के नाम हो रही खानापूर्ति
बता दें कि मनरेगा योजनाओं की प्रगति को लेकर प्रखंड स्तर पर प्रत्येक सप्ताह समीक्षा बैठक होती थी. इसमें निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने का दबाव रहता था, लेकिन रोजगार सेवकों के 12 मार्च से हड़ताल पर चले जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पंचायत सचिव, कनीय और सहायक अभियंता, मुखिया को जवाबदेही तय की गयी है, लेकिन हड़ताल अवधि के दौरान प्रखंड में समीक्षा बैठक में सिर्फ अबुआ और पीएम आवास तक ही सिमट कर रह गयी है.
चालू नहीं हो पा रही हैं नयी योजनाएं
मनरेगा योजना से चालू वित्तीय वर्ष में एक भी बागवानी लाभुकों का चयन प्रखंड में नहीं किया जा सका है. बिरसा मुंडा आम बागवानी के लाभुकों का चयन के बाद अप्रैल और मई माह में पिट की खुदाई का कार्य संपन्न कराना होता है, लेकिन हड़ताल का व्यापक असर इस पर पड़ा है. अब तक एक भी लाभुक का चयन नहीं किया जा सका है. यही हाल सिंचाई कूप का है. इस वर्ष कूप की खुदाई का समय समाप्त होने वाला है, लेकिन लाभुकों का चयन भी नहीं हुआ है.
क्या कहते हैं बीडीओ
इधर, बीडीओ सुनील कुमार मुर्मू का कहना है कि पंचायतों में योजना संचालन और डिमांड काटने के लिए पंचायत सचिव को जवाबदेही दी गयी है. सहायक व कनीय अभियंता को भी जिम्मेदारी देते हुए मजदूरों के डिमांड और भुगतान के लिए निर्देश दिया गया है. डिमांड के लिए ऑपरेटरों को लगाया गया है. उपस्थिति बनाने के लिए मेठ को एप की जानकारी दी जा रही है, ताकि समय पर उपस्थिति बनाया जा सके और भुगतान हो सके. कहा फिलहाल कार्य की अधिकता के कारण मनरेगा कार्यों पर असर पड़ा है. अबुआ और पीएम आवास के लाभुकों को प्राथमिकता के आधार पर मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है.
