पीरटांड़ प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में हाथियों का उत्पात अब महज संयोग नहीं, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के बीच बिगड़ते संतुलन का संकेत बनता जा रहा है. गुरुवार की देर रात तीन हाथियों ने चिलगा पंचायत के बरदही गांव में जमकर उत्पात मचाया.
हाथियों ने ग्रामीण सुमन प्रसाद सिंह की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त कर दी. इसके बाद करीब एक एकड़ में लगी फसलें रौंदकर नष्ट कर दीं. अचानक गांव में हाथियों के पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गयी.
जंगल का क्षेत्र घटने से बढ़ा खतरा
हाथियों के प्राकृतिक आवासन क्षेत्र के लगातार संकुचित होने और पर्यावरण के प्रति बढ़ती लापरवाही के बीच झुंड का आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करना ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है. आए दिन हाथियों के गांवों में पहुंचने से घर, चहारदीवारी और फसलें क्षतिग्रस्त हो रही हैं.
ग्रामीणों में डर का माहौल
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार आबादी की ओर आने से कभी भी बड़ी घटना हो सकती है. फसल और संपत्ति के नुकसान के साथ ग्रामीणों को जान-माल की भी चिंता सताती रहती है. उनका मानना है कि जंगलों में हाथियों के लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवासन क्षेत्र उपलब्ध नहीं रहने के कारण उनका विचरण क्षेत्र गांवों तक पहुंच रहा है.
हाथियों को खदेड़ना काफी नहीं
घटना के बाद पीड़ित सुमन प्रसाद सिंह ने वन विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है. ग्रामीणों ने भी हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.
उनका कहना है कि हाथियों को केवल खदेड़ने से समस्या का स्थायी हल नहीं होगा. वन क्षेत्र और हाथियों के प्राकृतिक आवासन को सुरक्षित करने, जंगलों में भोजन-पानी की उपलब्धता बढ़ाने तथा मानव-हाथी संघर्ष रोकने की दीर्घकालिक योजना पर काम करना जरूरी है.
