Giridih News :रक्तदान कराकर धनबाद के प्राइवेट नर्सिंग होम ले जा रहे ब्लड

Giridih News :गिरिडीह जिले में धनबाद जिले के प्राइवेट नर्सिंग होम्स के द्वारा रक्तदान शिविर लगाकर बड़े पैमाने पर खून चूसा जाता है और यहां से अवैध तरीके से ले जाया जाता है. इसके लिए स्थानीय लोगों का सहारा लेकर उनकी मदद से जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है और तरह-तरह से लोगों को समझाकर उनसे ब्लड दान कराया जाता है. ऐसा मामला पिछले तीन साल से गिरिडीह में देखने को मिल रहा है.

गिरिडीह में दो-दो ब्लड बैंक हैं संचालित, यहां हमेशा ब्लड की रहती है कमी

गिरिडीह जिले में धनबाद जिले के प्राइवेट नर्सिंग होम्स के द्वारा रक्तदान शिविर लगाकर बड़े पैमाने पर खून चूसा जाता है और यहां से अवैध तरीके से ले जाया जाता है. इसके लिए स्थानीय लोगों का सहारा लेकर उनकी मदद से जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है और तरह-तरह से लोगों को समझाकर उनसे ब्लड दान कराया जाता है. ऐसा मामला पिछले तीन साल से गिरिडीह में देखने को मिल रहा है. इस साल भी कई शिविरों में धनबाद के नर्सिंग होम्स के लोगों ने ब्लड एकत्रित कराया और भारी मात्रा में ब्लड अपने साथ ले गये. जिला मुख्यालय में स्थित कबीर ज्ञान मंदिर में पिछले तीन वर्षों से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर रक्तदान शिविर लगाया जाता रहा है. इस वर्ष भी 27 अगस्त को कबीर ज्ञान मंदिर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है. बताया गया कि इस शिविर में भी पुन: धनबाद के ही दो नर्सिंग होम्स के लोग ब्लड लेने के लिए सामग्री लेकर आने वाले हैं. हालांकि गिरिडीह के सिविल सर्जन के स्तर से अब तक रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति नहीं ली गयी है. मामले को लेकर पूर्व के सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा का कहना है कि इस तरह से ब्लड का ट्रांसपोर्टेशन करना ही अवैध है. जबकि सूत्रों का कहना है कि गिरिडीह में दो-दो ब्लड बैंक संचालित है. जहां हमेशा ब्लड की कमी रहती है. काफी प्रयास के बाद संबंधित मरीजों को व्यवस्था कर उन्हें उपलब्ध कराया जाता है.

गिरिडीह जिले में थैलेसीमिया के मरीजों को नहीं मिल पाता है ब्लड

भारतीय रेड क्रास सोसाइटी के चेयरमैन अरविंद कुमार ने बताया कि गिरिडीह जिले में थैलेसीमिया के सबसे ज्यादा मरीज हैं. इसके अलावे सिकल सेल एनिमिया और इमोफेलिया के मरीजों को भी प्रत्येक माह ब्लड की जरूरत पड़ती है. बताया कि जिले में औसतन 833 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है. इतना ब्लड एकत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. बताया कि जिले के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. लगभग 250 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे इस जिले में हैं, जिन्हें हर माह तीन से चार यूनिट रक्त की जरूरत होती है. गिरिडीह ब्लड बैंक के जरिये ऐसे बच्चों को नि:शुल्क व बिना रिप्लेस की ब्लड की आपूर्ति की जाती है. बताया कि इन मरीजों के लिए हर माह सात सौ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है और इसके लिए विभिन्न संस्थाओं व प्रखंड कार्यालयों में शिविर लगाकर रक्त की व्यवस्था की जाती है. इसके अलावे आकस्मिक दुर्घटना व अन्य जरूरतमंद लोगों को रिप्लेस के आधार पर ब्लड की आपूर्ति की जाती है. श्री अरविंद ने कहा कि कई प्राइवेट नर्सिंग होम की शिकायत मिल रही है कि वे स्थानीय लोगों के सहयोग से रक्तदान शिविर लगवाते हैं और ब्लड एकत्रित कर ले जाते हैं, फिर इसका कारोबार भी किया जाता है.

गांडेय में शिविर लगाने वालों की सामग्री हुई थी जब्त

बता दें कि इसी तरह बिना अनुमति के गांडेय में भी कुछ माह पूर्व धनबाद के ही एक नर्सिंग होम के लोगों द्वारा रक्तदान शिविर लगाया गया था. बिना अनुमति के लगाये गये इस शिविर के संबंध में स्थानीय जागरूक लोगों ने इसकी जानकारी तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा को दी थी. सूचना मिलते ही डॉ मिश्रा ने एक टीम को गांडेय भेजा और वहां रक्तदान शिविर के खून चूसने की प्रक्रिया को रोका गया. इतना ही नहीं, सिविल सर्जन के निर्देश पर रक्तदान शिविर लगाने वाले लोगों की सभी सामग्री भी जब्त कर ली गयी थी.

इस तरह के रक्तदान शिविर को नहीं मिलेगी अनुमति : सिविल सर्जन

इधर, गिरिडीह के सिविल सर्जन डॉ शेख मोहम्मद जफरूल्ला ने कहा कि 27 अगस्त को रक्तदान शिविर लगाने को लेकर अब तक किसी ने आवेदन नहीं दिया है और न ही शिविर लगाने की अनुमति ली गयी है. उन्होंने कहा कि इस तरह के रक्तदान शिविर को लगाने की अनुमति इस जिले में कभी नहीं दी जायेगी. उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के इस तरह का शिविर लगाया जाना अवैध है. इस जिले में गिरिडीह सदर अस्पताल के साथ-साथ भारतीय रेड क्रास सोसाइटी का भी ब्लड बैंक है. कहा कि जब इस जिले में ब्लड की कमी है तो फिर ऐसे में कोई संस्था दूसरे जिले को ब्लड कैसे भेज सकती है.

धनबाद में गिरिडीह के जरूरतमंदों को मिलता है ब्लड : कबीर आश्रम

कबीर आश्रम से जुड़े अरूण माथुर का कहना है कि गिरिडीह जिले से कई मरीजों को धनबाद रेफर किया जाता है और वहां कई बार ब्लड की व्यवस्था करने में परेशानी हुई है. इस परेशानी को देखते हुए धनबाद के प्राइवेट नर्सिंग होम में संचालित ब्लड बैंक को ब्लड उपलब्ध करायी जा रही है. उन्होंने कहा कि प्राइवेट नर्सिंग होम के ब्लड बैंक को लाइसेंस है या नहीं, यह जानकारी उन्हें नहीं है. साथ ही श्री माथुर ने यह भी कहा कि पूर्व में गिरिडीह के ब्लड बैंक में ब्लड देने से डोनर कार्ड दिया जाता था जिससे दूसरे जिले में जरूरतमंदों को ब्लड मिल जाता था. लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों से इस तरह का डोनर कार्ड रेड क्रास सोसाइटी के द्वारा जारी नहीं किया जाता है. (राकेश सिन्हा, गिरिडीह)

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Author: PRADEEP KUMAR

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