डुमरी में आजादी के दशकों बाद भी सड़क को तरस रहे 7 गांव, मरीजों को खाट पर ढोने की क्यों आई नौबत?

डुमरी प्रखंड के 7 गांव दशकों से पक्की सड़क की राह देख रहे हैं. कच्ची, पथरीली सड़क के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच मुश्किल हो गई है. बरसात में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है.

गिरिडीह. विकास और ग्रामीण संपर्क सुदृढ़ करने के दावों के बीच डुमरी प्रखंड के धावाटांड़ से कुसुआबेड़ा और बिरहोरगढ़ा को जोड़ने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा मार्ग आज भी पक्की सड़क की प्रतीक्षा कर रहा है. इस मार्ग पर निर्भर सात गांवों के ग्रामीण वर्षों से कच्चे, पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 700 से अधिक आबादी इस मार्ग से सीधे प्रभावित होती है.

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो रही है. बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब रास्ते में कीचड़, गड्ढे और जलजमाव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है.

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बरसात में कट जाता है संपर्क

स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के दौरान कई स्थानों पर रास्ता क्षतिग्रस्त हो जाता है. मिट्टी और मोरम बह जाने से बड़े गड्ढे बन जाते हैं, जिससे पैदल चलना और दोपहिया वाहन चलाना जोखिम भरा हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग फिसलकर घायल भी हो चुके हैं.

ग्रामिण हिरालाल महतो | Prabhat Khabar Network

ग्रामीणों के मुताबिक कुसुआबेड़ा और बिरहोरगढ़ा समेत आसपास के गांवों के लोगों को हाट-बाजार, प्रखंड मुख्यालय, सरकारी कार्यालय और अस्पताल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और परेशानी का सामना करना पड़ता है.

स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आपात स्थिति में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है.

ग्रामिण दीपक श्रीवास्तव | Prabhat Khabar Network

स्थानीय निवासी हुलसी देवी ने कहा कि बरसात में इस रास्ते से गुजरना बेहद कठिन हो जाता है और कई बार लोग चोटिल हो चुके हैं. वहीं ग्रामीण हिरा लाला महतो ने कहा कि पक्की सड़क नहीं होने से गांव के लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है.

बच्चों की पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

सड़क की खराब स्थिति का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है. बिरहोरगढ़ा के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जंगल और कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. छात्र जय नारायण ने बताया कि बरसात के दिनों में फिसलन और कीचड़ के कारण स्कूल आने-जाने में काफी कठिनाई होती है.

पहले हुआ काम नहीं दे सका स्थायी समाधान

ग्रामीणों के अनुसार कुछ वर्ष पहले इस मार्ग पर मिट्टी-मोरम का कार्य और दो पुलियों का निर्माण कराया गया था. हालांकि बरसात के दौरान अधिकांश हिस्सा बह गया और समस्या जस की तस बनी हुई है. लोगों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए पूरे मार्ग का पक्कीकरण आवश्यक है.

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाया मुद्दा

भाजपा नेता दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि इस मार्ग का उपयोग करीब सात गांवों के लोग करते हैं और सड़क की खराब स्थिति के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है.

ग्रामिण रूपाणी देवी | Prabhat Khabar Network

वहीं छछंदो पंचायत की मुखिया रूपाणी देवी ने बताया कि उनके कार्यकाल में मनरेगा से मिट्टी-मोरम का काम कराया गया था तथा बिरहोरगढ़ा में विधायक मद से लगभग 300 फीट पीसीसी सड़क का निर्माण हुआ है. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर इतनी बड़ी सड़क परियोजना के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होते. सड़क निर्माण की मांग कई बार संबंधित अधिकारियों तक पहुंचायी गयी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है.

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शीघ्र पक्की सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि क्षेत्र के लोगों को आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सके.

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By Shashi kumar jais

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