गिरिडीह. उपायुक्त रामनिवास यादव ने सीसीएल गिरिडीह क्षेत्र का निरीक्षण कर विभिन्न खनन परियोजनाओं, बंद हो रही खदानों, जमीन धंसने वाले क्षेत्रों और पर्यावरण पुनर्वास से जुड़े कार्यों का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान सीसीएल गिरिडीह एरिया के जीएम केएस गैवाल, प्रोजेक्ट ऑफिसर जीएस मीणा समेत सीसीएल के कई अधिकारी मौजूद थे.
डीसी ने गिरिडीह ओसीपी, धोबीडीह इनक्लाइन, रीजनल हॉस्पिटल के समीप जमीन धंसने वाले स्थल तथा भदुआ ओसीपी का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने खनन कार्यों की वर्तमान स्थिति के साथ खदान बंदी, भूमि पुनर्वास और पर्यावरण बहाली से संबंधित योजनाओं की जानकारी ली.
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खनन के बाद भूमि के उपयोग पर जोर
गिरिडीह ओसीपी में सीसीएल अधिकारियों ने खनन के बाद भूमि को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल उपयोग में लाने के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि खदान बंद होने के बाद भूमि के पुनर्वास के साथ उसके उत्पादक उपयोग की दिशा में योजनाएं तैयार की जा रही हैं.
धोबीडीह इनक्लाइन में सुरक्षा उपायों की जानकारी
धोबीडीह इनक्लाइन के निरीक्षण के दौरान डीसी को वर्तमान इनक्लाइन और उससे जुड़े खनन कार्यों के बारे में बताया गया. अधिकारियों ने इनक्लाइन को हटाने अथवा बंद करने के प्रस्ताव के साथ खदान के मुहानों और गड्ढों को सुरक्षित करने के प्रस्तावित उपायों की भी जानकारी दी. इसका उद्देश्य अनधिकृत प्रवेश और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है.
इसके बाद टीम ने रीजनल हॉस्पिटल के समीप जमीन धंसने वाले स्थल का निरीक्षण किया. सीसीएल अधिकारियों ने क्षेत्र में पूर्व में हुई अवैध खनन गतिविधियों और उससे बने भूमिगत खाली स्थानों की जानकारी दी. अधिकारियों के अनुसार, ऐसे स्थानों की पहचान कर बैकफिलिंग के प्रयास किये जा रहे हैं.
भदुआ ओसीपी में 100 मेगावाट सोलर प्लांट की योजना
भदुआ ओसीपी में अधिकारियों ने भूमि सुधार के तहत करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में बैकफिलिंग के प्रस्ताव की जानकारी दी. इसके अलावा पुनर्वासित भूमि के उत्पादक उपयोग के लिए प्रस्तावित 100 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर डेवलपमेंट/सोलर प्लांटेशन की योजना से भी डीसी को अवगत कराया गया.
निरीक्षण के दौरान खदान बंदी, भूमि पुनर्वास, पर्यावरण बहाली, परित्यक्त खदानों की सुरक्षा, जमीन धंसने की समस्या और खनन के बाद भूमि के टिकाऊ व उत्पादक उपयोग से जुड़ी वर्तमान एवं प्रस्तावित गतिविधियों पर चर्चा हुई. सीसीएल अधिकारियों ने पुरानी खदानों और पूर्व में हुई अवैध खनन गतिविधियों से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए किये जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी.
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