देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, लेकिन गावां प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित डाबर गांव के ग्रामीण आज भी बेहतर सड़क और पुल की सुविधा से वंचित हैं. प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए गांव से सीधी और सुगम सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है. बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है. नदी में जलस्तर बढ़ने और बाढ़ आने के बाद गांव का संपर्क मार्ग बाधित हो जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को करीब पांच किलोमीटर की दूरी के बजाय लगभग आठ किलोमीटर का चक्कर लगाकर प्रखंड मुख्यालय पहुंचना पड़ता है.
वर्षों से सड़क और पुल निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि डाबर गांव में सड़क और नदी पर पुल की समस्या वर्षों पुरानी है. कई बार स्थानीय स्तर पर सड़क और पुल निर्माण की मांग प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखी गयी, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. ग्रामीणों के अनुसार, डाबर गांव के लिए नदी पर पुल की आवश्यकता थी, लेकिन सेरुआ में पुल का निर्माण कर दिया गया. इससे डाबर गांव के लोगों की समस्या दूर नहीं हुई.
बाढ़ आते ही बढ़ जाती है परेशानी
सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह कच्चे और ग्रामीण रास्तों से आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ते ही रास्ता जोखिम भरा हो जाता है. कई बार आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. इससे समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त खपत होती है.
बच्चों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी
बरसात में आवागमन बाधित होने का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ता है. इलाज के लिए प्रखंड मुख्यालय या अस्पताल जाने वाले मरीजों को भी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. वहीं, रोजमर्रा के काम के लिए प्रखंड मुख्यालय आने-जाने वाले ग्रामीणों को भी परेशानी उठानी पड़ती है.
ग्रामीणों ने मांगा स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित गांव तक बेहतर सड़क और पुल की सुविधा नहीं होना चिंता का विषय है. ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से डाबर गांव को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने के लिए पक्की सड़क का निर्माण कराने और नदी पर पुल बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि सड़क और पुल का निर्माण होने से बरसात में संपर्क बाधित होने की समस्या दूर होगी और ग्रामीणों को आवागमन की स्थायी सुविधा मिल सकेगी.
