एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू को लेकर रविवार को गिरिडीह में उनके परिवार और राजनीतिक संगठनों के बीच बयानबाजी सामने आयी. परिसदन भवन में प्रेस वार्ता कर मंटू के बड़े भाई प्रेमचंद मुर्मू ने आरोप लगाया कि भाजपा उनके भाई को राजनीतिक गतिविधियों में आगे कर रही है. उन्होंने कहा कि परिवार ने मंटू को पढ़ाई के लिए गिरिडीह भेजा था, लेकिन अब वह राजनीति में सक्रिय हो गया है. वहीं, मंटू मुर्मू ने अपने भाई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि झामुमो के दबाव में आकर यह बयान दिया गया है.
भाई बोले- पढ़ाई के बजाय राजनीति में लगाया जा रहा
प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि मंटू कई वर्षों से गिरिडीह में रहकर पढ़ाई कर रहा है. परिवार की इच्छा थी कि वह पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाए. लेकिन अब वह राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गया है.
उन्होंने कहा कि हाल की घटना के बाद उन्हें जानकारी मिली कि मंटू को मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने के लिए आगे किया गया था. इससे परिवार के लोग चिंतित हैं. प्रेमचंद ने आरोप लगाया कि भाजपा के लोगों ने मंटू को अपने प्रभाव में ले लिया है और वह परिवार से भी दूर होता जा रहा है.
उन्होंने बताया कि मंटू पढ़ाई में अच्छा है और एनसीसी का प्रमाणपत्र भी हासिल कर चुका है. घटना के बाद फोन पर मंटू से बात हुई थी. उस समय मंटू ने किसी गंभीर चोट से इनकार किया था. प्रेमचंद ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उनके भाई का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने मंटू से पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की.
झामुमो नेता ने भाजपा पर साधा निशाना
इस दौरान झामुमो जिला सचिव महालाल सोरेन ने भी भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि घटना के दिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की गयी थी. उन्होंने दावा किया कि आदिवासी समाज और झामुमो ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया.
मंटू बोले- मैं अपनी इच्छा से एबीवीपी से जुड़ा हूं
अपने भाई के बयान पर मंटू मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2016 में गिरिडीह कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह एनसीसी से जुड़े थे. इसी दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं के संपर्क में आए और बाद में संगठन से जुड़ गये.
मंटू ने कहा कि एबीवीपी छात्रों और देशहित में काम करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई झामुमो के दबाव में आकर बयान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह खुद पीजी के छात्र हैं और उन्हें अपने फैसले लेने की पूरी समझ है.
मंटू ने स्पष्ट किया कि उन पर किसी राजनीतिक दल का दबाव नहीं है. वह आगे भी एबीवीपी से जुड़े रहेंगे और छात्रों की समस्याओं तथा उनके हितों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे.
