भेलवाघाटी नरसंहार: 11 सितंबर 2005 की वह खूनी रात, 21 साल बाद भी नहीं भूला पाया गांव; जानें पूरी कहानी

भेलवाघाटी नरसंहार के 21 साल पूरे, 11 सितंबर 2005 की उस खूनी रात को याद कर आज भी सहम जाते हैं ग्रामीण. जानें क्या है पूरी घटना और पीड़ितों का दर्द.

गिरिडीह. भेलवाघाटी नरसंहार की 21वीं बरसी पर गांव में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. वर्ष 2005 में 11 सितंबर की रात भाकपा माओवादी के नक्सलियों द्वारा भेलवाघाटी गांव में किए गए नरसंहार की याद आज भी ग्रामीणों के जेहन में ताजा है.

हालांकि, समय के साथ इलाके में नक्सलियों के कदम उखड़ गए, लेकिन उस घटना की दहशत अब भी ग्रामीणों के बीच महसूस की जाती है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में इलाके में नक्सली गतिविधियों का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय मजदूर कल्याण सेवा संघ के माध्यम से गांव में ग्राम रक्षा दल का गठन किया गया था.

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ग्राम रक्षा दल के सदस्यों को पहचान पत्र भी उपलब्ध कराया गया था. ग्रामीणों ने गांव में नक्सलियों का प्रवेश रोकने का निर्णय लिया था, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय नक्सली आक्रोशित थे.

11 सितंबर 2005: जब नक्सलियों ने पूरे गांव को घेरा

ग्रामीणों के अनुसार, 11 सितंबर 2005 की रात नक्सलियों ने पूरे गांव को घेर लिया था. लाउडस्पीकर से ग्राम रक्षा दल के सदस्यों को घरों से बाहर निकलने के लिए कहा गया. जब कोई सदस्य बाहर नहीं निकला तो उन्होंने जबरन लोगों को घरों से निकाला.

बताया जाता है कि इस दौरान गांव के सौ से अधिक लोगों को चौराहे पर एकत्रित किया गया. अन्य ग्रामीण बाहर न आ सकें, इसके लिए कई घरों की कुंडी बाहर से बंद कर दी गई थी. इसके बाद ग्राम रक्षा दल के सदस्यों के हाथ बांध दिए गए. गांव के चौराहे पर तथाकथित जन अदालत लगाकर ग्रामीणों को सजा सुनाई गई और अंधाधुंध हिंसा में कई लोगों की जान ले ली गई.

17 ग्रामीणों ने गंवाई थी जान

इस घटना में कुल 17 लोगों की मौत हुई थी. मृतकों में मजीद अंसारी, मकसूद अंसारी, मंसूर अंसारी, रज्जाक अंसारी, सिराज अंसारी, रामचंद्र हाजरा, गणेश साव, अशोक हाजरा, जमाल अंसारी, कलीम अंसारी, एक अन्य कलीम अंसारी, हमीद मियां, करीम मियां, चेतन सिंह, दिल मोहम्मद अंसारी और यूसुफ अंसारी समेत अन्य शामिल थे.

घटना के बाद गांव में मातम पसर गया था. भय के कारण कई परिवार गांव से पलायन कर गए थे. बाद में स्थिति सामान्य होने पर कई परिवार वापस लौटे. आज भी बरसी के मौके पर परिजन उस रात की त्रासदी को याद कर भावुक हो उठते हैं.

आश्वासनों के बावजूद विकास की बाट जोह रहा भेलवाघाटी

परिजनों का कहना है कि घटना के बाद गांव पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने भेलवाघाटी को आदर्श पंचायत बनाने, आश्रितों को आवास देने और ढाई-ढाई लाख रुपये मुआवजा देने का भरोसा दिया था. परिजनों के अनुसार, मुआवजे के रूप में पीड़ित परिवारों को आंशिक राशि ही मिल सकी. वहीं कई परिवारों को अब तक पक्के आवास की सुविधा नहीं मिल पाई है. परिजनों का कहना है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव में जरूरी बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं हो सकी हैं.

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मृतकों की स्मृति में प्रतिमा लगाने की मांग

भेलवाघाटी के मुखिया विकास कुमार ने नरसंहार में मारे गए लोगों की याद में प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि पूर्व में भी इस संबंध में आश्वासन दिए गए थे, जो अब तक लंबित हैं. उन्होंने वर्तमान सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मृतकों की स्मृति में स्मारक या प्रतिमा का निर्माण कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां ग्रामीणों के इस संघर्ष को याद रख सकें.

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By Shrawan kumar

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