काम करने वाले मजदूरों का मस्टर रोल में शून्य प्रविष्टि कर देने से मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ. इस मामले को बीडीओ ने गंभीरता से लिया है. मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए मजदूरों को मजदूरी भुगतान से वंचित रखने के लिए मुखिया और पंचायत सचिव को कार्य में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता, उदासीनता और वरीय अधिकारियों के आदेश का उल्लंघन करने का दोषी ठहराते हुए स्पष्टीकरण मांगा है. कहा है नियत समय तक स्पष्टीकरण नहीं देने पर इसकी रिपोर्ट वरीय अधिकारी के पास उक्त पंचायतों के मुखिया और पंचायत सचिव के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्राचार किया जायेगा.
इन पंचायतों के मुखिया व पंचायत सचिव को देना होगा स्पष्टीकरण
बीडीओ ने पत्र में कहा है कि जिला स्तर पर मनरेगा योजना की अप्रैल माह में एमआइएस प्रतिवेदन की समीक्षा में पता चला है कि झलकडीहा पंचायत में 53, हरिला में 47, चितमाडीह में 43, बड़कीटांड़ में 32, ओझाडीह में 30, चपुआडीह में 29, जरूआडीह में 26, फिटकोरिया में 24, गोलगो में 21 और मोतीलेदा पंचायत में 20 मस्टर रोल के मजदूरों को मजदूरी भुगतान के स्थान पर मुखिया और पंचायत सचिव ने शून्य कर दिया. मस्टर रोल के शून्य कर देने से उक्त मजदूरों को भुगतान नहीं हो पाया. उक्त पंचायतों के मुखिया और पंचायत सचिव पर विभागीय आदेश और मनरेगा अधिनियम का अनुपालन में लापरवाह बताया गया है. इधर, बीडीओ सुनील कुमार मुर्मू के निकाले गये शो काॅज से उक्त पंचायतों के मुखिया और पंचायत सचिवों में बौखलाहट का माहौल है. दिनभर प्रखंड परिसर का चक्कर काटते हुए बचाव के जुगाड़ में जुटे हुये हैं.मजदूरों को नहीं मिल रहा काम
रोजगार सेवकों की हड़ताल के कारण काम उपलब्ध कराने की गति थम गयी है. पूरे जिले में मार्च माह में 6.57 प्रतिशत, अप्रैल में 6.66 प्रतिशत और मई में 31.62 प्रतिशत मानव दिवस का सृजन हो पाया है. इसे देखते हुए डीसी रामनिवास यादव ने गंभीरता से लेते हुए एक सप्ताह के अंदर काम पर वापस आने की बात कही है. कहा ऐसा नहीं करने वाले रोजगार सेवकों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. डीसी के निर्देश के बाद हड़ताल पर गये रोजगार सेवकों में हड़कंप है.
