गणित-विज्ञान के शिक्षक मिलें तो मैट्रिक में राज्य स्तर पर बेहतर परिणाम की उम्मीद : एचएम

सरिया स्थित बालिका उच्च विद्यालय छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहा है, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी के कारण नियमित पढ़ाई बाधित हो रही है. एचएम ने गणित और विज्ञान के शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है, ताकि मैट्रिक परीक्षा में बेहतर परिणाम आ सकें.

लक्ष्मी नारायण पांडेय. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न योजनाओं के साथ विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. सरिया स्थित बालिका उच्च विद्यालय भी छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने की दिशा में काम कर रहा है. विद्यालय में कक्षा नौवीं और दसवीं में कुल 410 छात्राएं नामांकित हैं. हालांकि, शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई को लेकर चुनौती बनी हुई है.

1972 में हुई थी विद्यालय की स्थापना

प्रधानाध्यापक मुकेश प्रसाद यादव के अनुसार विद्यालय की स्थापना वर्ष 1972 में स्थानीय शिक्षा प्रेमियों के प्रयास से हुई थी. वर्तमान में प्रधानाध्यापक समेत शिक्षकों के 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से छह शिक्षक ही कार्यरत हैं. विद्यालय में एक क्लर्क पदस्थापित है. आदेशपाल का पद रिक्त रहने से परिसर की साफ-सफाई और अन्य दैनिक व्यवस्थाओं में परेशानी होती है.

प्रधानाध्यापक ने बताया कि सीमित मानव संसाधन के बावजूद छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उपलब्ध शिक्षकों के स्तर से नियमित प्रयास किया जाता है.

30 डिसमिल परिसर में उपलब्ध हैं आधुनिक सुविधाएं

विद्यालय करीब 30 डिसमिल क्षेत्र में फैला है. परिसर में 14 कक्षाएं, कार्यालय, कॉमन रूम, वोकेशनल कोर्स के लिए तीन लैब, सात बाथरूम, दो स्मार्ट क्लास, पैड बैंक और कंप्यूटर कक्ष हैं. परिसर में सोलर लाइट की व्यवस्था भी है.

छात्राओं की सुरक्षा और विद्यालय परिसर की निगरानी के लिए चहारदीवारी के अंदर-बाहर तथा आवश्यक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं. छात्राओं के लिए आरओ से शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध है.

डिजिटल संसाधनों से पढ़ाई को बनाया जा रहा आसान

विद्यालय में खेल सामग्री के अलावा ज्ञानवर्धक पुस्तकों और परीक्षा की तैयारी से संबंधित सामग्री वाला पुस्तकालय भी है. छात्राएं खाली समय में पुस्तकालय का उपयोग करती हैं. तकनीकी शिक्षा और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर, डिजिटल बोर्ड और प्रोजेक्टर की सुविधा उपलब्ध है.

विद्यालय प्रबंधन का प्रयास है कि इन संसाधनों का उपयोग कक्षा शिक्षण के साथ परीक्षा की तैयारी में भी किया जाये, ताकि छात्राओं को पाठ्यक्रम समझने में सुविधा हो.

पांच वर्षों से मैट्रिक परिणाम बेहतर

प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यालय का मैट्रिक परीक्षा परिणाम पिछले पांच वर्षों से लगातार बेहतर रहा है. गिरिडीह जिले में विद्यालय का प्रदर्शन चौथे स्थान तक रहा है. इसके बावजूद गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी को वह विद्यालय के सामने प्रमुख चुनौती मानते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग की ओर से गणित और विज्ञान विषय के शिक्षकों की नियुक्ति होती है, तो छात्राओं की पढ़ाई को और मजबूती मिलेगी. उनके अनुसार इससे विद्यालय के मैट्रिक परीक्षा परिणाम में सुधार की संभावना है और विद्यालय राज्य स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.

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By Laxmi narayan pa

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