महोत्सव की शुरुआत गिरिडीह सदर एसडीओ श्रीकांत यशवंत विस्पुते, संगीत नाटक एकेडमी अवार्डी और गुरुमां अन्नपूर्णा देवी के शिष्य पंडित नित्यानंद हल्दीपुर, अंतर्राष्ट्रीय संगीतज्ञ पंडित शम्भू दयाल केडिया, पंडित मोरमुकुट केडिया, पं मनोज केडिया ने की.
एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुति
पहली प्रस्तुति पं शंभुदयाल केडिया ने हारमोनियम वादन कर की. बाद में इंदौर से आई शास्त्रीय गायिका शोभा चौधरी ने अपने गायन से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. दिल्ली से आए तबला वादक देवाशीष अधिकारी ने तबला और कोलकाता के सूरज शर्मा ने हारमोनियम पर बेहतरीन संगत की. झारखंड रत्न केडिया बंधु ने राग हेमंत बजाकर सितार-सरोद की अपनी जुगलबंदी का अद्भुत प्रदर्शन किया. इनके साथ तबले पर दिल्ली से आये पं दुर्जय भौमिक ने शानदार संगत की. पुणे से आए पं अमोल निशाय ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी. अंतिम प्रस्तुति में मुंबई के पं नित्यानंद हल्दीपुर ने अद्भुद बांसुरी वादन से संगीत की गहराइयों से श्रोताओं को रूबरू कराया. इनके साथ तबले पर कोलकाता के पं सुजीत साहा ने शानदार संगत की. मंच संचालन संगीत साधना केंद्र के अध्यक्ष नीलकमल भरतीया एवं हर्षित केडिया ने किया.
इनकी रही सहभागिता
मौके पर एएसपी सुरजीत कुमार, मुंबई के सिद्धार्थ श्रीवत्स, राजेंद्र भरतीया, पवन चूड़ीवाला, कृष्णा बगड़िया, सुनील केडिया, सुंदर केडिया, लख्खी गोरीसरिया, बी अगस्त क्रांति कुमार, अजय सिन्हा मंटू, दयाशंकर सिंह, राजीव रंजन, रामकुमार सिन्हा, रमाकांत मिश्रा, बसंत मंडल, सुनील मंथन शर्मा, विश्वजीत सेठ, अरत चंद्रा, मनोज जालान, संजीत सिंह, विशेश्वर पाठक, मुकुंद मिश्रा, बद्री दास सहित सैकड़ों संगीत प्रेमी उपस्थित थे.
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