श्याम महतो ने बताया कि सोमवार सुबह परिजनों ने घर का दरवाजा तोड़ा, तो मां और बेटी दोनों छत से लटकी मिलीं. मृतक महिला के पति सोनू रवानी ने बताया कि पुतुल ने पांच लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन मासिक किस्त नहीं चुका पाने की वजह से वह तनाव में थी. अधिकारी ने बताया कि किस्त चुकाने के लिए कर्ज वसूली एजेंटों के बार-बार फोन करने से महिला परेशान थी. दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम गिरिडीह सदर अस्पताल में कराया गया. थाना प्रभारी श्याम महतो ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है. लेकिन हम सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं.
रविवार देर रात की घटना, सुबह पता चली
पुतुल देवी और स्नेहा कुमारी द्वारा आत्महत्या करने की जानकारी मिलने पर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव व मुफस्सिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने शवों का पंचनामा बनाकर सदर अस्पताल भिजवा दिया. पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है. सोनू रवानी ने पुलिस को बताया कि रविवार रात परिवार के सभी सदस्य खाना खाकर सोने चले गये. सोमवार की सुबह जब काफी विलंब के बाद भी दोनों अपने कमरे से बाहर नहीं निकलीं, तो अनहोनी की आशंका हुई. उसने खिड़की से झांककर देखा, तो दोनों फंदे से लटकते दिखीं. सोनू रवानी ने शोर मचाया. मौके पर परिवार के अन्य सदस्य व ग्रामीण आ गये. ग्रामीणों की मदद से शव फंदे से उतारे गये.
एजेंटों के फोन कॉल्स से डरी-सहमी और अवसाद में थी पुतुल देवी
जांच के दौरान एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी. मृतका के पति सोनू रवानी ने पुलिस को बताया कि पुतुल देवी कुछ दिनों से काफी परेशान चल रही थी. पूछने पर बताया था कि उसने एक महिला समूह से करीब पांच लाख रुपये का लोन लिया था. पुतुल लोन चुकता नहीं कर पा रही थी. उसने लोन के बारे में परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं बताया था. उसने यह भी नहीं बताया कि लोन कहां से लिया और किस कार्य के लिए इतनी बड़ी राशि की जरूरत पड़ी. बकौल साेनू, लोन देनेवाले समूह या कंपनी के एजेंटों द्वारा पुतुल को लगातार फोन कर पैसों की मांग की जा रही थी. वह काफी डरी-सहमी और तनाव में रहने लगी थी. एजेंट आये दिन फोन कॉल्स के जरिए पैसों की मांग करते और धमकाते. नतीजा, पुतुल देवी के व्यवहार में परिवर्तन आ गया था. हालांकि उसने कभी खुलकर अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं की.
कोट
मां-बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है. अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस वजह से दोनों ने आत्महत्या की. हालांकि पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है.
जीतवाहन उरांव, एसडीपीओ
एजेंट की प्रताड़ना से तंग आकर तिसरी की सुलेखा ने कर लिया था सुसाइड
माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की प्रताड़ना का यह कोई नया मामला नहीं है. साल 2024 के 23 दिसंबर को एक महिला ने कर्मियों की प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगा ली थी. तिसरी थाना क्षेत्र के भुराई गांव निवासी सुलेखा देवी ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 50 हजार रुपये का ऋण लिया था. शुरुआती दौर में उसने कुछ किस्त चुकता की थी. बाद में आर्थिक तंगी के कारण वह किस्तें समय पर जमा नहीं कर सकी. कंपनी के कर्मचारी बकाया राशि की वसूली के लिए लगातार दबाव बनाने लगे. वे बार-बार फोन करते. वे लोग घर पर पहुंच जाते थे. मानसिक दबाव और तनाव के बीच सुलेखा देवी ने मौत को गले लगा लिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
