चिरुवांशरीफ में सूफी संत हजरत सैयद गौस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह का प्रसिद्ध मजार शरीफ स्थित है, जहां प्रतिवर्ष तीन दिवसीय उर्स का आयोजन होता है. उर्स के दौरान बाबा गौस अली शाह के मजार पर तीन दिनों तक चादरपोशी की जाती है. देश के कोने-कोने से आने वाले जायरीन बाबा से देश में अमन-चैन की दुआ मांगते हैं.
जायरीन की सुविधा की ख्याल रख रही है कमेटी
इस संबंध में गौसिया कमेटी के सरपरस्त रफीक अंसारी ने बताया कि मेले में जायरीन की सुख-सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया है, दूर-दराज से आने वाले जायरीन के लिए ठहरने, खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था की गयी है. 24 घंटे भोजन की व्यवस्था जारी है. मेले परिसर में रोशनी की भी पर्याप्त व्यवस्था की गयी है. सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त मात्रा में वॉलंटियर्स नियुक्त किये गये हैं. वहीं, पुलिस बल की तैनाती भी की गयी है.मजार का हो रहा जीर्णोद्धार
बताया गया कि लगभग 56 वर्ष पूर्व बना बाबा गौस अली शाह का मजार जर्जर अवस्था में पहुंच चुका था. आपसी सहयोग से मजार का जीर्णोद्धार कार्य जारी है. वर्ष 1972 में दीन की तबलीग के लिए यहां तशरीफ लाने वाले और 1981 में परदे में जाने वाले इस महान सूफी संत के लाखों आशिकों की आस्था का यह प्रमुख केंद्र अब नयी चमक-दमक के साथ लौट रहा है. मजार की जीर्णोद्धार अनुयायियों के सहयोग, दान और समाजसेवियों की मेहनत से आगे बढ़ रहा है.
जलसा में जुटे लोग
उर्स का पहला दिन 29 जनवरी को गुस्ल-ए-शरीफ के साथ शुरू हुआ. दूसरे दिन जुम्मे के रोज देर शाम जलसे की महफिल सजी. जबकि, तीसरे दिन शनिवार को भव्य कव्वाली का आयोजन होगा. इस दौरान गुलाम हबीब पेंटर और अजर सबरी जैसे मशहूर कव्वाल अपनी प्रस्तुति देंगे. इधर, मेले में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है. झूले, मौत का कुआं, जादू-टोना के खेल, मिठाइयों और खिलौनों की दुकानें मेले की रौनक बढ़ा रही हैं.
