लाख टके का सवाल, कहां लगे ''चौपाल''

विडंबना. करोड़ों के भुगतान के बावजूद वर्षों से अधूरे पड़े हैं दर्जनाधिक पंचायत भवन झारखंड अलग राज्य गठन के बाद सूबे में दो बार पंचायत चुनाव हो चुका है, लेकिन प्रशासन आज भी धनवार प्रखंड में पंचायती राज व्यवस्था के संचालन के लिए पंचायत सचिवालयों कानिर्माण नहीं करा सका. निर्माण मद में करोड़ों के भुगतान […]

विडंबना. करोड़ों के भुगतान के बावजूद वर्षों से अधूरे पड़े हैं दर्जनाधिक पंचायत भवन
झारखंड अलग राज्य गठन के बाद सूबे में दो बार पंचायत चुनाव हो चुका है, लेकिन प्रशासन आज भी धनवार प्रखंड में पंचायती राज व्यवस्था के संचालन के लिए पंचायत सचिवालयों कानिर्माण नहीं करा सका. निर्माण मद में करोड़ों के भुगतान के बावजूद कई पंचायत सचिवालय वर्षों से अधूरे पड़े हैं.राजधनवार : वर्ष 2009, 2010 व 2011 में स्वीकृत 28 में से एक हेमरोडीह को छोड़ सभी पंचायत भवन अधूरे बने हैं.
गत पांच वर्षों से पंचायत समिति की हर मासिक बैठक में इससे संबंधित सवाल उठाये गये, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. तत्कालीन बीडीओ मोहनलाल मरांडी के कार्यकाल में आवंटित इन 28 पंचायत भवनों के निर्माण के लिए मनरेगा व बीआरजीएफ मद से लगभग तीन करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी हुआ है, लेकिन हेमरोडीह को छोड़ किसी का निर्माण पूरा नहीं हुआ.
निकासी होती रही, काम रुका रहा : अंबाटांड़ पंचायत में 8 लाख की निकासी कर मात्र डीपीसी तक काम कर छोड़ दिया गया. वहीं पांडेयडीह में पांच लाख की निकासी पर सिर्फ डीपीसी तक काम हुआ.
गुंडरी में 10 लाख, महेशमरवा में 12 लाख, गोरहंद व बोदगो में पांच-पांच लाख तथा गरजासारन में आठ लाख 90 हजार की निकासी की गयी, लेकिन छत ढलाई तक भी काम नहीं कराया गया. चंद्रखो, डुमरडीहा, द. डोरंडा, सिरसाय, बांधी, भलुटांड़, पड़रिया, धनैपुरा व जरूवाडीह में प्रथम तल्ला की ढलाई के बाद से काम बंद है. लाल बाजार, सापामारन, गलवांती, केंदुआ, बरजो, उ. धनवार, उ. डोरंडा, अरखांगो, करगालीखुर्द, नीमाडीह व धरमपुर के पंचायत भवन भी दो तल्ला ढलाई के बावजूद पूरा नहीं कराया जा सका है.

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