थम नहीं रहा गजराज का कहर

दहशत. लेदा में पांच घरों को तोड़ा, भगाने में जुटे ग्रामीण और वन विभाग हाथियों के झुंड ने 10 दिनों से गिरिडीह जिले में उत्पात मचा रखा है. बिरनी, डुमरी व गिरिडीह प्रखंड के ग्रामीण दहशत में हैं. लगभग 50 एकड़ जमीन में लगे गेहूं, चना व सब्जियों की फसल नष्ट हो चुकी है. दर्जन […]

दहशत. लेदा में पांच घरों को तोड़ा, भगाने में जुटे ग्रामीण और वन विभाग
हाथियों के झुंड ने 10 दिनों से गिरिडीह जिले में उत्पात मचा रखा है. बिरनी, डुमरी व गिरिडीह प्रखंड के ग्रामीण दहशत में हैं. लगभग 50 एकड़ जमीन में लगे गेहूं, चना व सब्जियों की फसल नष्ट हो चुकी है. दर्जन भर से अधिक घरों को झुंड ने तोड़ दिया है. घरों में रखे-अनाज बरतन को भी नष्ट कर दिया है.
गिरिडीह : हाथी से प्रभावित गांवों के लोग रतजगा कर रहे हैं. रात में आग जलाकर हाथियों को भगाने का प्रयास भी कर रहे हैं. रविवार की रात 14 हाथियों का यह झुंड सदर प्रखंड की लेदा व सिंदवरिया पंचायत में घुसा. सिंदवरिया पंचायत के सरकबाद, लालपुर, कोल्हरिया होते हुए लेदा गांव के दक्षिणी छोर में अवस्थित टोला भोगताडीह में झुंड ने प्रवेश करते ही बद्री दास, जीतु राय, लाटो राय, हुरो राय, राजू दास, कमरूद्दीन अंसारी के घर की दीवार को ध्वस्त कर दिया और अंदर रखा अनाज खा गये.
इससे पहले हाथियों के आने की खबर से ग्रामीण घरों से बाहर निकल आये. बाद में भोगताडीह, लेदा, कोल्हरिया, लालपुर के ग्रामीण जुटे झुंड को भगाने के लिए टीन, ढोल बजाना शुरू कर दिया. ग्रामीणों ने मशाल भी जलायी, लेकिन झुंड गांव से नहीं भागा. देर रात को वन विभाग के संजय कुमार, विंदेश्वर पासवान व समेत कई कर्मी पहुंचे और हाथियों को गांव से करीब एक किलोमीटर दूर बराकर नदी के पास तक खदेड़ दिया.
मुआवजा की मांग: हाथी से प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजा की मांग वन विभाग से की है. सामाजिक कार्यकर्ता शिवनाथ साव ने कहा है कि हाथियों से हुए नुकसान का उचित मुआवजा मिलना चाहिए.

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