डुमरी : सूचना क्रांति के दौर में इंटरनेट पर सर्च इंजन क्या-क्या नहीं खोज रहा है. निमयाघाट थानांतगर्त भिखनीडीह के एक परिवार को इसी सर्च इंजन ने 12 वर्ष पहले घर सेनिकल गये उसके लाल से मिला दिया. भिखनीडीह निवासी स्व. महरू सिंह का बेटा भुनेश्वर सिंह आर्थिक तंगी के कारण छह वर्ष की उम्र में अपने घर से निकल गया था. काफी तलाश के बावजूद घरवालों को उसका कोई पता नहीं चल सका था. पुत्र के गायब होने के वियोग में करीब आठ वर्ष पूर्व पिता महरू की मौत हो गयी थी. एक सप्ताह पूर्व भुनेश्वर ने एक दोस्त की मदद से इंटरनेट के माध्यम से अपने घर का पता लगाया और तीन दिन पहले अपने गांव लौटआया.
फिल्मी रोमांच से भरी है कहानी
: भुनेश्वर की वापसी से उसके परिवार सिहत पूरे गांव में खुशी है. हालांकि इस परिवार ने भुनेश्वर के हमशक्ल एक अन्य बच्चे को अपना पुत्र मान वर्ष उसकी परवरिश की. 12 वर्ष पूर्व एक बच्चे की गुमशुदगी, उसके स्थान पर एक हमशक्ल को अपना बेटा मान कर उसकी परवरश करने व असली बेटे की वापसी किसी फिल्मी कहानीसे कम नहीं है.
तंगी-प्रताड़ना से राहत के लिए
भागता रहा : बताया जाता है कि भिखनीडीह निवासी महरू सिंह के परिवार की आर्थिक स्थित पहले काफी खराब थी.
इसी स्थिति के कारण छह वर्षीय भुनेश्वर को उसके एक रिश्तेदार ने 12 वर्ष पूर्व भागलपुर के एक घर में काम दिला दिया था. करीब छह माह के बाद भुनेश्वर वहां से भाग कर वापस अपने घर भिखनीडीह लौट आया था. लेकिन उसके रिश्तेदार ने उसे फिर जबरन भागलपुर के उसी घर में पहुंचा दिया था, यहां उसे प्रताड़ित किया जाता था. इसलिए उस घर से भाग कर उसने कटिहार, देवघर, नवादा, गया, पटना आदि शहरों में होटल में नौकरी की.
सूचना की कमी ने किया असहाय : इस दौरान भुनेश्वर को अपने घर-परिवार की याद आती थी, लेकिन घर का पता नहीं जानने के कारण वह लाचार था. बीते छह साल से वह पटना की एक बिस्कुट फैक्टरी में काम कर रहा था. पर्व-त्योहार के मौके पर उस फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर जब अपने घर चले जाते तो वह वहां अकेले रहता था. घर की याद में वह घंटों रोता था. उसकी मजबूरी थी कि घर के नाम पर वह केवल भिखनीडीह व निमियाघाट तथा माता-पिता का नाम ही जानता था.
इसे कहते हैं दोस्ती : भुनेश्वर को अक्सर परेशान देखकर उसके दोस्त सोनू ने उसे उसके घर का पता लगाने का बीड़ा उठाया. सोनू ने इंटरनेट पर निमियाघाट सर्च किया तो उसे निमियाघाट थाना का नंबर पता चला. इसके बाद सोनू ने फोन पर निमियाघाट थाना से संपर्क कर भिखनीडीह के बारे में जानकारी प्राप्त की और थाना प्रभारी आरके राणा को भुनेश्वर की जानकारी दी.
तंत्र ने किया काम : साथी की सूचना पर थाना प्रभारी श्री राणा ने भिखनीडीह के मुखिया राजकुमार महतो को पूरे मामले की जानकारी दी. श्री महतो ने थाना प्रभारी को गुमशुदगी के किस्से से रूबरू कराया. पूरे मामले की जानकारी होने पर भुनेश्वर की मां मालती देवी गांव के कुछ लोगों के साथ पटना पहुंची और अपने 12 वर्ष पूर्व गायब बच्चे को लेकर गांव लौट गयी. इस दौरान बिस्कुट फैक्टरी के मालिक ने उसे उसकी मजदूरी के 30 हजार रुपये देकर विदा किया.
बेटे के लिए यहां-वहां भटकती रही मां : भुनेश्वर के भिखनीडीह वापस लौटने के वर्षों पहले से उसका हमशक्ल उसके परिवार का सदस्य बना हुआ है. मां मालती देवी ने बताया कि गांव के एक ड्रइवर ने जानकारी दी थी कि उसका बेटा मध्यप्रदेश के एक घर में काम करता है और उसका मालिक उसे बहुत प्रताड़ित करता है. जानकारी होने पर कुछ लोगों के साथ वह मध्यप्रदेश पहुंची तो देखा कि भुनेश्वर की हमशक्ल का एक बच्चा वहां था, जिसे लोग गार्डेन कह कर बुलाते थे. मालती देवी को देख गार्डेन रोने लगा और मां कह उससे लिपट गया. उसके बाद गार्डेन को अपना भुनेश्वर मान कर सभी उसे लेकर भिखनीडीह लौट गये.
भुनेश्वर और गार्डेन दोनों रहेंगे : करीब तीन साल पहले मालती देवी ने गार्डेन की शादी कर दी. शादी के बाद गार्डेन को एक पुत्री हुई. पुत्री के जन्म के बाद गार्डेन रोजगार की तलाश में नागपुर चला गया. फिलहाल वह नागपुर में ही काम कर रहा है. इस तरह भिखनीडीह के इस परिवार के पास 12 वर्ष पहले गायब बेटा के स्थान अब दो बेटा है. इधर, मालती देवी का कहना है कि अब वह दोनों बेटे को घर में रखेंगी.
