अमरा के सरकारी स्कूल में 511 विद्यार्थियों की पढ़ाई सिर्फ सात शिक्षकों के भरोसे

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. डुमरी प्रखंड के अमरा के सरकारी विद्यालय में 511 छात्र-छात्राओं के लिए केवल सात शिक्षक हैं. सबसे गंभीर बात यह है कि प्लस टू में 90 विद्यार्थियों के लिए एक भी शिक्षक नहीं है, जिससे नियमित पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है.

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावों के बीच डुमरी प्रखंड के अमरा में संचालित सरकारी विद्यालय की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. एक ही परिसर में प्राथमिक से लेकर प्लस टू तक की पढ़ाई होती है और यहां कुल 511 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इन्हें पढ़ाने के लिए फिलहाल महज सात शिक्षक कार्यरत हैं. सबसे गंभीर स्थिति प्लस टू की है, जहां 90 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं है.

विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है. विभागीय व्यवस्था से निराश अभिभावकों और विद्यार्थियों को अब अपने विधायक जयराम महतो से हस्तक्षेप की उम्मीद है.

हाई स्कूल में आठ पद, काम कर रहे सिर्फ दो शिक्षक

हाई स्कूल में शिक्षकों के आठ पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो शिक्षक कार्यरत हैं. इन दो शिक्षकों के जिम्मे करीब 190 विद्यार्थियों की पढ़ाई है. ऐसे में विषयवार और नियमित कक्षाएं संचालित करना चुनौती बना हुआ है.

एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं और अलग-अलग विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ रहा है.

प्लस टू के 90 विद्यार्थियों के लिए एक भी शिक्षक नहीं

विद्यालय की सबसे गंभीर स्थिति प्लस टू खंड की है. यहां करीब 90 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं है. विद्यार्थियों का नामांकन और परीक्षा तो हो रही है, लेकिन नियमित पढ़ाई के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं.

बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति और परेशानी वाली है. कई विद्यार्थी मजबूरी में ट्यूशन और कोचिंग का सहारा ले रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

प्राचार्य के तबादले के बाद छह शिक्षक ही बचेंगे

विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कपिलदेव करमाली का भी तबादला हो चुका है. उन्होंने अभी विद्यालय का प्रभार नहीं सौंपा है. उनके जाने के बाद विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की संख्या घटकर छह रह जाने की संभावना है.

ऐसे में सवाल है कि छह शिक्षक प्राथमिक से प्लस टू तक के 511 विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था कैसे संभालेंगे. उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से विद्यालय में करीब 12 से 13 शिक्षकों की जरूरत बतायी जा रही है. यानी वर्तमान संख्या जरूरत की तुलना में लगभग आधी है.

प्राथमिक से प्लस टू तक शिक्षकों का संकट

विद्यालय के प्राथमिक खंड में दो सरकारी शिक्षक और तीन पारा शिक्षक कार्यरत हैं. अपर प्राइमरी की पढ़ाई एक सहायक शिक्षक के भरोसे है. हाई स्कूल में दो शिक्षक हैं, जबकि प्लस टू में शिक्षकों की संख्या शून्य है.

इस तरह एक ही परिसर में संचालित चार स्तरों की शिक्षा व्यवस्था गंभीर मानव संसाधन संकट से जूझ रही है. विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की कमी से पढ़ाई का पूरा दबाव उपलब्ध शिक्षकों पर है.

भवन तैयार, फिर भी प्लस टू की पढ़ाई अधर में

प्लस टू के लिए विद्यालय भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक विभागीय स्तर पर उसका हैंडओवर नहीं हुआ है. भवन तैयार होने के बावजूद 90 विद्यार्थियों को उसका पूरा शैक्षणिक लाभ नहीं मिल पा रहा है.

विद्यार्थियों और अभिभावकों का सवाल है कि जब भवन तैयार हो चुका है तो उसका हैंडओवर कराकर पढ़ाई की व्यवस्था शुरू करने में देरी क्यों हो रही है.

शिक्षक ही नहीं, चहारदीवारी और पानी की भी समस्या

विद्यालय सिर्फ शिक्षकों की कमी से नहीं जूझ रहा है. पूरे परिसर में चहारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा की समस्या बनी हुई है. पेयजल के लिए दो चापाकल और एक सरकारी कुआं है, लेकिन कुआं जर्जर स्थिति में है.

गर्मी के दिनों में बोरिंग का पानी सूखने और चापाकल से पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायत भी रहती है. विद्यार्थियों ने पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जतायी है. इसके अलावा छात्र-छात्राओं की संख्या के अनुपात में बेंच-डेस्क की भी कमी है.

अभिभावकों का सवाल- नामांकन के बाद पढ़ायेगा कौन?

अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाने से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी. बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक और पढ़ने के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराने होंगे.

उनका सवाल है कि जब हाई स्कूल में आठ शिक्षक पद सृजित हैं, तो उनमें से केवल दो पदों पर ही शिक्षक क्यों हैं. 90 विद्यार्थियों वाले प्लस टू में एक भी शिक्षक नहीं होना विभागीय व्यवस्था पर बड़ा सवाल है.

विषयवार शिक्षक बहाली और सुविधाओं की मांग

विद्यार्थियों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से तत्काल विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति, प्लस टू भवन का हैंडओवर, चहारदीवारी निर्माण, पर्याप्त बेंच-डेस्क और पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की है. उनका कहना है कि समय पर कदम नहीं उठाया गया, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा.

प्राचार्य ने भी मानी शिक्षकों की कमी

प्रभारी प्राचार्य कपिलदेव करमाली ने बताया कि उनका भी तबादला हो चुका है. उन्होंने पुष्टि की कि प्लस टू हाई स्कूल का अब तक विभागीय स्तर पर हैंडओवर नहीं हुआ है. उन्होंने विद्यालय में शिक्षकों की कमी और चहारदीवारी नहीं होने की समस्या की भी पुष्टि की.


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By Shashi kumar jais

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