मामला ओड़िशा के चिकित्सक के अपहरण का
गिरिडीह/डुमरी : नेशनल हाइवे टू डुमरी से अपहृत ओड़िशा के वेटनरी डॉक्टर मानस रंजन दास की बरामदगी को ले परेशान पुलिस छठे दिन भी बिहार की खाक छानती रही. गया-औरंगाबाद के अपराधियों की खोज करती रही, लेकिन अबतक कुछ विशेष सफलता नहीं मिल सकी है. सोमवार को टेक्निकल सेल ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी गिरिडीह पुलिस को उपलब्ध करायी है.
मिली जानकारी पर गिरिडीह एसपी अखिलेश बी वारियर और उनकी टीम सुबह से ही काम करती रही.बताया जाता है कि पुलिस ने घटना के दिन घटनास्थल के समीप व घटना के बाद इलाके में संचालित मोबाइल में से कई का डाटा भी निकाल लिया है. अपहृत के मोबाइल सिम का भी सीडीआर पुलिस ने निकाला है. इस सीडीआर से उन नंबरों व सर्वर का पता निकला है जिनसे अपहृत की बात घटना के दिन, घटना से पहले हुई थी. यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के दिन अपहृत कारोबारी हाजीपुर से डुमरी के बीच किन-किन स्थानों पर कितनी देर रुके थे.
आइजी ने की समीक्षा : इससे पहले रविवार की रात को आइजी मुरारीलाल मीणा जब गिरिडीह पहुंचे तो उन्होंने भी इस अपहरणकांड की समीक्षा की.
एसपी से घटना के बाद अबतक की गयी कार्रवाई, छापामारी अभियान में किन-किन पदाधिकारियों को लगाया गया है, क्या-क्या जानकारी मिली है और कौन-कौन से अपराधी इस इलाके में सक्रिय रहे है व किसका हाथ इस घटना में हो सकता है सबकी क्रमवार जानकारी ली. आइजी श्री मीणा ने इस कांड के उद्भेदन के लिए आवश्यक निर्देश भी पुलिस पदाधिकारियों को दिया.
अबतक नहीं मांगी गयी फिरौती
चिकित्सक की पत्नी हनी दत्ता ने जो एफआइआर दर्ज करायी थी उसमें अपहरण का कारण फिरौती को ही माना गया है, लेकिन अब तक फिरौती मांगने की बात सामने नहीं आयी है. पुलिस के अधिकारी भी कहते हैं कि अपहरणकर्ताओं ने अब तक पीड़ित परिवार से संपर्क नहीं किया है और न ही फिरौती मांगी है. इधर बताया जाता है कि सोमवार को अपहृत की पत्नी समेत उनके परिजनों ने रांची में डीजीपी से मुलाकात कर डॉ मानस रंजन दास की सकुशल रिहाई की गुहार लगायी है.
