दमनकारी सरकार से लड़ने के लिए हमें तैयार रहना है

दमनकारी सरकार से लड़ने के लिए हमें तैयार रहना है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां योजना से महिलाओं को, वृद्धावस्था पेंशन से वृद्धों को तथा रोजगार देकर नौजवानों को मजबूत करने का काम किया है. वहीं महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उनकी सरकार ने बेहतर कदम उठाया है. जन्म से लेकर मृत्यु तक कुछ न कुछ देने का वे लोग काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री गुरुवार को मेराल प्रखंड के पेशका उच्च विद्यालय के मैदान में आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम में जनता को संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 लाख महिलाओं को मंईयां योजना से जोड़ा गया है. जबकि 18 वर्ष से अधिक उम्र की दो से 2.5 लाख बच्चियों को और जोड़ने की योजना है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सदियों से झारखंड को लूटा गया है. यही कारण है कि सोने की चिड़िया कहे जाने वाले झारखंड के लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं. मुख्यमंत्री ने उपस्थित महिलाओं से मंच से ही पूछा कि मंईयां योजना और सावित्रीबाई फुले योजना पसंद. उन्होंने लोगों से सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की पसंद- नापसंद की बात पूछकर सीधा संवाद करने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि राज्य के प्रति घरों में पांच साल के अंदर एक-एक लाख रु प्रति बर्ष पहुंचाएं. वहीं उनकी सरकार ने 200 यूनिट बिजली मुफ्त कर दी है. उधर सभी छात्रावासों में मुफ्त भोजन की व्यवस्था की गयी है. केंद्र ने चार साल तक पैसा रोके रखा : मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का चार वर्ष तक पैसा रोक कर रखा. उन्होंने आठ लाख गरीबों को आवास बनाने का लक्ष्य रखा था. जब केंद्र सरकार ने पैसा नहीं दिया, तो उन्होंने 20 लाख गरीबों को अबुआ आवास योजना के तहत आवास देने का निर्णय लिया. जब योजना शुरू हुई, तब केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का पैसा रिलीज किया. हेमंत ने कहा कि उन्होंने सहायक पुलिस, पारा शिक्षक सबका वेतन 100 से 200 प्रतिशत तक बढ़ाया है. यह गरीब जनता की सरकार है. तय समय पर कर रहे काम : हेमंत ने कहा कि उनकी सरकार नदी-नालों को पार कर बैलगाड़ी, ट्रैक्टर या जिस किसी साधन से हो, वहां नियत तिथि को गांव-पंचायत में जाकर काम कर रही है. लोगों के बीच उनके हक अधिकार दिलाने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्दी कई राज्यों में विधानसभा की चुनाव है. आगामी चुनाव में एक तरफ गुजरात के व्यवसायी व पूंजीपति की सरकार होगी, वहीं दूसरी तरफ गरीबों की सरकार. पूंजीपतियों की दमनकारी सरकार से हमलोगो को लड़ने को तैयार रहना है. वे अगल-बगल के राज्यों से झारखंड में कई रूपों में आपके बीच आयेंगे, जिन्हें आप चिह्नित करें. नहीं तो वह जात-पात, धर्म-समाज, हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बांटकर आपको छल-प्रपंच में डालकर धोखा देने का काम करेंगे. झारखंड को उन्होंने भिखमंगा बना कर रखा है : सीएम ने कहा कि आप आगामी विधानसभा चुनाव में होशियार रहेंगे. ऐसा नहीं हुआ, तो पिछले 25 वर्षों से यही कहकर झारखंड को भिखमंगा बना करके वे रखे हुए हैं. उन्हें गरीबों के हक अधिकार रास नहीं आ रहा है. वे उनको भी फंसा कर जेल भेजने का काम किये थे, लेकिन आज न्यायालय ने उन्हें आरोप से बरी कर दिया है. कार्यक्रम में उपायुक्त शेखर जमुआर ने स्वागत भाषण दिया. इस अवसर पर पलामू प्रमंडल क्षेत्र के डीआईजी, गढ़वा पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार पांडेय, जिप अध्यक्ष शांति देवी, जिलाध्यक्ष तनवीर आलम, पार्टी प्रवक्ता धीरज दुबे, मेराल बीडीओ जागो महतो, अंचल पदाधिकारी यशवंत नायक एवं गढ़वा पलामू लातेहार क्षेत्र से आये गणमान्य एवं दोनों जिलों के काफी संख्या में लोग उपस्थित थे. गढ़वा का विकास विरोधियों को चुभ रहा है : मिथिलेश ठाकुर कार्यक्रम को स्वच्छता एवं पेयजल मंत्री मिथलेश ठाकुर ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेवारी है. आखिर बांग्लादेशी कैसे हमारे देश में घुस जाते हैं. इसकी पूरी जवाबदेही केंद्र सरकार की है. जब उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरकार में मंत्री बनकर गढ़वा की तंगहाली दूर करना शुरू किया, तो विरोधियों की आंखों में कांटा गड़ना शुरू हो गया है. अब जनता समझ चुकी है. वर्तमान विधानसभा में काम के आधार पर जनता वोट देगी. जात-पात, हिंदू मुस्लिम धर्म समाज से दूर हटकर जनता विकास पर वोट करेगी. अल्प समय में सरकार ने काफी काम किया : रामचंद्र सिंह जनसभा में लातेहार के विधायक रामचंद्र सिंह ने कहा कि झामुमो सरकार गांव में रहने वाले गरीब-गुरबों की सरकार है. कोरोना काल के बाद अल्प समय में झारखंड के विकास के लिए सरकार ने जो काम किया है, वह काबिले तारीफ है. उन्होंने लोगों से जाति-धर्म से ऊपर उठकर आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने का आह्वान किया विलंब से पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पेशका हाई स्कूल के मैदान में अपने नियत समय से काफी विलंब से पहुंचे. उन्हें अपराह्न एक बजे आना था. लेकिन उनका आगमन 3:11 बजे हुआ. हेलीपैड पर उनके स्वागत के लिए मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, झामुमो जिला अध्यक्ष तनवीर आलम, पलामू डीआइजी वाइएस रमेश, गढ़वा उपायुक्त शेखर जमुआर, गढ़वा पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार पांडेय सहित झामुमो पार्टी के लोग मौजूद थे. मुख्यमंत्री का स्वागत किया : हैलीपैड पर सबने पुष्पगुच्छ देकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया. इसके बाद मुख्यमंत्री ने पंडाल में आकर औपचारिक रूप से कार्यक्रम की शुरूआत की. इस दौरान लातेहार जिले में 600 करोड़ की विभिन्न योजनाओं का आनलाइन शिलान्यास भी मुख्यमंत्री ने किया.

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नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

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