प्रतिनिधि, मेराल
मेराल पूर्वी पंचायत के वार्ड संख्या-एक स्थित जलमीनार पिछले छह वर्षों से बंद पड़ा है. गर्मी इलाके के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग करते हुए जलमीनार का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन इसके बाद से इसे कभी भी नियमित रूप से संचालित नहीं किया जा सका. करोड़ों की यह महत्वाकांक्षी योजना विभाग की उदासीनता के कारण पूरी तरह पानी में बह गयी है. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, गढ़वा के समन्वय से इस जलमीनार का निर्माण कार्य पूरा कराया गया था. निर्माण के बाद कुछ दिनों तक ट्रायल (परीक्षण) के रूप में जलापूर्ति की गयी, लेकिन इसके बाद यह बंद हो गया और दोबारा चालू नहीं हो सका.
तकनीकी संसाधन आज भी दुरुस्त
जलमीनार के अधिकांश तकनीकी संसाधन आज भी सही स्थिति में हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, सोलर सिस्टम और बोरवेल पूरी तरह कार्यशील हैं, इसके बावजूद विभाग और स्थानीय समिति इसे चालू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है.
हर परिवार से वसूले 450 रुपये, 15 दिन ही हुई आपूर्तिस्थानीय ग्रामीण सिकंदर मेहता ने बताया कि जलमीनार से घर-घर पानी पहुंचाने के नाम पर प्रत्येक परिवार से 450 रुपये कनेक्शन शुल्क के रूप में लिए गये थे. शुल्क जमा करने के बाद केवल 15 दिनों तक ही नलों से पानी टपका, जिसके बाद पूरी व्यवस्था ठप हो गयी. तब से लेकर आज तक ग्रामीण पेयजल के लिए दूर-दूर के स्रोतों पर निर्भर हैं और भटकने को विवश हैं.
जलमीनार निर्माण के बाद कुछ दिनों तक ट्रायल हुआ. इसके बाद इसके नियमित संचालन के लिए एक स्थानीय उपभोक्ता समिति का गठन किया जाना था, लेकिन आपसी तालमेल की कमी के कारण समिति का गठन नहीं हो सका. परिणामस्वरूप जलमीनार वर्षों से बंद पड़ा है.
रामसागर महतो, मुखिया, मेराल पूर्वी पंचायत
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है. शीघ्र ही विभागीय कनीय अभियंताओं और अधिकारियों की एक टीम को मौके पर भेजकर इसकी विस्तृत जांच करायी जायेगी. जांच में यह पता लगाया जायेगा कि जलमीनार किन तकनीकी या व्यावहारिक कारणों से बंद पड़ा है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाते हुए जलापूर्ति व्यवस्था को दोबारा बहाल करने का प्रयास किया जायेगा
अजय कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग