अवैध बालू कारोबार पर लगाम नहीं, पदाधिकारी नहीं ले रहे छापेमारी में रूचि
उदासीनता. एसडीएम के निर्देश के बावजूद नहीं हो रही नियमित छापेमारी
उदासीनता. एसडीएम के निर्देश के बावजूद नहीं हो रही नियमित छापेमारी पीयूष तिवारी, गढ़वा गढ़वा जिले में अवैध बालू का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी रोक लगाने के लिए किये जा रहे सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. स्थिति यह है कि गढ़वा शहरी क्षेत्र में निजी भवनों से लेकर सरकारी इमारतों तक के निर्माण में धड़ल्ले से अवैध बालू का उपयोग किया जा रहा है. इससे जिम्मेदार विभागों और पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. जिले में अवैध बालू के उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने की जिम्मेदारी खनन विभाग, अंचल कार्यालय और थाना स्तर तक तय की गयी है. बावजूद इसके अवैध कारोबार रुकने के बजाय और तेज होता नजर आ रहा है. करीब दो माह पूर्व, 14 नवंबर को गढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) द्वारा इस संबंध में अनुमंडल क्षेत्र के सभी अंचल पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था. निर्देश में नियमित छापेमारी अभियान चलाने, अवैध बालू के उत्खनन व परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने और प्रत्येक शनिवार को इससे संबंधित प्रतिवेदन एसडीओ कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा गया था. इसके साथ ही जिला खनन पदाधिकारी को भी बालू माफियाओं के खिलाफ जुर्माना व प्राथमिकी दर्ज करने जैसी कठोर कार्रवाई करते हुए उसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया था. लेकिन सूत्रों के अनुसार, इन निर्देशों का व्यापक स्तर पर पालन नहीं हो रहा है. अधिकांश थाना, अंचल और खनन विभाग की ओर से न तो नियमित प्रतिवेदन भेजे जा रहे हैं और न ही ठोस कार्रवाई की जानकारी दी जा रही है. अब तक केवल गढ़वा और मेराल अंचल की ओर से एक-एक बार प्रतिवेदन भेजा गया है, जिसमें एक-एक ट्रैक्टर बालू जब्त किये जाने की सूचना दी गयी है. शेष अंचलों और थानों की चुप्पी को गंभीरता से लेते हुए एसडीओ ने अनुमंडल क्षेत्र के सभी अंचल पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों से शोकॉज किया है. इससे स्पष्ट होता है कि अवैध बालू कारोबार के प्रति प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित रुचि और सक्रियता का अभाव है. तीन बार में भी नहीं हो सकी बालू घाटों की नीलामी गढ़वा जिले में वर्ष 2019 तक 19 सरकारी बालू घाट संचालित थे. इसके बाद सरकार की नीति में बदलाव के कारण बालू घाटों की नीलामी नहीं हो सकी और वैध बालू कारोबार लगभग ठप हो गया. इसका सीधा फायदा अवैध कारोबारियों को मिला और बालू का काला कारोबार तेजी से फैलने लगा. वर्ष 2025 में सरकार द्वारा गढ़वा जिले के 18 बालू घाटों के लिए तीन बार निविदा प्रक्रिया शुरू की गयी, लेकिन एक बार भी संवेदकों ने रुचि नहीं दिखायी. बताया गया कि तीन राज्यों की सीमा से सटे होने के कारण बालू घाटों का मूल्य काफी अधिक निर्धारित किया गया है. 18 घाटों के लिए कुल 718.21 लाख रुपये तय किये गये हैं, जिसे संवेदक अव्यावहारिक मान रहे हैं. इसी कारण तीसरी बार भी टेंडर प्रक्रिया विफल हो गयी. परिणामस्वरूप पिछले करीब छह वर्षों से जिले में वैध बालू कारोबार न के बराबर है. नियमित रूप से हो रही छापेमार: सीओइस मामले में गढ़वा अंचल पदाधिकारी सफी आलम ने कहा कि नियमित रूप से छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है और प्रतिवेदन भी भेजे जा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि कितने प्रतिवेदन भेजे गये हैं, इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है.
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