रामकथा में रामावतार के दिव्य रहस्यों का वर्णन
प्रतिनिधि, गढ़वा
स्थानीय नरगिर आश्रम में आयोजित रामकथा अमृत वर्षा के तीसरे दिन अयोध्या से पधारे संत बाल स्वामी प्रपन्नाचार्य ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को रामावतार के रहस्यों और उसके दिव्य कारणों का सरल व विस्तृत वर्णन किया. कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला. अपने प्रवचन में स्वामी जी ने बताया कि परब्रह्म परमेश्वर को धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए साकार रूप में अवतरित होना पड़ा. उन्होंने कहा कि भक्तों की प्रार्थना और विभिन्न श्रापों के कारण भी भगवान को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा. मनु-शतरूपा की याचना तथा जय-विजय, वृंदा और नारद मुनि के श्राप के परिणामस्वरूप भगवान राम ने धरती पर अवतार लिया. स्वामी जी ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसमें सत्संग का अवसर मिलना बहुत बड़ा सौभाग्य है. बिना सत्संग के विवेक उत्पन्न नहीं होता और विवेक के बिना परमात्मा को समझ पाना कठिन है. उन्होंने बताया कि मानव जीवन का मुख्य लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति होना चाहिए. उन्होंने ज्ञान, वैराग्य और भक्ति मार्ग का उल्लेख करते हुए भक्ति मार्ग को सबसे सरल बताया. उनके अनुसार निर्मल मन वाले व्यक्ति भगवान को अत्यंत प्रिय होते हैं. स्वामी जी ने यह भी कहा कि सुख और दुःख में समान भाव रखना ही सच्ची सज्जनता की पहचान है. सज्जनता किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर वर्ग में पाई जाती है. उन्होंने दुःख और विपत्ति को ईश्वर के करीब आने का माध्यम बताया और कहा कि ऐसे समय में घबराने के बजाय प्रभु का अधिक स्मरण करना चाहिए. मानव के पतन का मुख्य कारण अहंकार बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रभुता मिलने पर अहंकार उत्पन्न हो जाता है, जिससे ऋषि-मुनि और देवता भी नहीं बच सके. इस अवसर पर राम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजकों द्वारा आकर्षक झांकी निकाली गयी, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. गायकों ने राम जन्म के छंद और बधाई गीतों की मधुर प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. रामकथा समिति के अध्यक्ष चंदन जायसवाल ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही कार्यक्रम सफल और आनंदमय बन सका. उन्होंने समिति के सदस्यों के समर्पण और कार्यों की सराहना की.
