जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट
गढ़वा. मानसून की शुरुआत में बारिश की बेरुखी के कारण जिले में धान की खेती पर संकट गहरा गया था. जून और जुलाई में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण धान की रोपनी बुरी तरह पिछड़ गयी थी. हालांकि अगस्त में हुई अच्छी बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी और धान की रोपनी ने तेजी पकड़ ली. जिला कृषि विभाग के अनुसार, इस खरीफ मौसम में जिले में धान आच्छादन का लक्ष्य 56,400 हेक्टेयर रखा गया था. इसके मुकाबले 31 अगस्त तक करीब 85 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी पूरी हो चुकी थी. यानी लगभग 47,940 हेक्टेयर में धान का आच्छादन हो चुका है.
13 अगस्त तक सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश
मानसून की शुरुआत में जिले में बारिश की स्थिति काफी चिंताजनक थी. 13 अगस्त तक जिले में सामान्य 779.4 मिलीमीटर के मुकाबले मात्र 327.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी थी. इस तरह सामान्य वर्षापात की तुलना में करीब 58 प्रतिशत बारिश कम हुई थी. जून में सामान्य 138.8 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 15.6 मिलीमीटर बारिश हुई. वहीं जुलाई में सामान्य 362.4 मिलीमीटर की तुलना में 212.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी. अगस्त के शुरुआती दिनों में भी पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में पानी की कमी बनी रही और धान की रोपनी प्रभावित हुई.
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एक अगस्त तक महज 4.27 फीसदी हुई थी रोपनी
बारिश की कमी का सीधा असर धान की रोपनी पर पड़ा. एक अगस्त तक जिले में धान की रोपनी लक्ष्य के महज 4.27 प्रतिशत क्षेत्र में ही हो सकी थी. नौ अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर 12.18 प्रतिशत और 13 अगस्त तक करीब 31 प्रतिशत पहुंचा था. इसके बाद अगस्त के दूसरे और तीसरे सप्ताह में लगातार हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी और पानी उपलब्ध हुआ. इसके बाद किसानों ने तेजी से रोपनी शुरू की और महीने के अंत तक धान आच्छादन करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच गया.
जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान के अनुसार, प्रखंडों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जिले में करीब 85 प्रतिशत धान की रोपनी पूरी हो चुकी थी. मझिआंव प्रखंड में भी करीब 80 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी होने की जानकारी दी गई है. बारिश के बाद लगभग सभी प्रखंडों में धान की खेती ने रफ्तार पकड़ी है.
देर से रोपनी के कारण फसल को लेकर चिंता
हालांकि इस वर्ष धान की रोपनी का बड़ा हिस्सा निर्धारित समय से काफी देर से हुआ है. ऐसे में देर से रोपे गए धान की फसल पर मौसम का असर पड़ सकता है. किसानों के लिए अब फसल को तैयार करने के लिए पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसम जरूरी होगा. अगस्त की बारिश ने धान की खेती को भले ही बड़ी राहत दी है, लेकिन शुरुआती सूखे की वजह से फसल की उत्पादकता को लेकर किसानों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
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खरीफ की अन्य फसलों में भी आई तेजी
जिले में इस वर्ष खरीफ खेती का कुल लक्ष्य 1,37,840 हेक्टेयर रखा गया था. शुरुआती मानसून में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित हुई थी. बाद में बारिश होने से अन्य फसलों के आच्छादन में भी तेजी आई. धान जिले की प्रमुख खरीफ फसल है. इसलिए इसके आच्छादन की स्थिति पर किसानों के साथ कृषि विभाग की भी विशेष नजर बनी हुई है. जून-जुलाई में बारिश की कमी से जहां धान की खेती संकट में आ गई थी, वहीं अगस्त की अच्छी बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है. लक्ष्य के मुकाबले 85 प्रतिशत क्षेत्र में रोपनी पूरी होने के बाद अब किसानों की उम्मीदें अच्छी पैदावार पर टिकी हैं. आने वाले दिनों में बारिश और मौसम की स्थिति धान की फसल के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी.
