गढ़वा से पीयूष तिवारी की रिपोर्ट
गढ़वा: झारखंड अधिकारी शिक्षक एवं कर्मचारी महासंघ (झारोटेफ) के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने रक्षाबंधन पर्व के दिन विद्यालय खोले जाने के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने गढ़वा के उपायुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी से आदेश पर पुनर्विचार करते हुए विद्यालय खोलने की तिथि में संशोधन की मांग की है.
सुशील कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पारिवारिक पर्व है. यह भाई-बहन के स्नेह और पवित्र संबंधों का प्रतीक है. ऐसे अवसर पर विद्यालय खोलने का निर्णय शिक्षकों की धार्मिक भावनाओं और पारिवारिक दायित्वों को देखते हुए पुनर्विचार योग्य है.
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक आस्था और परंपराओं का पालन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है. शिक्षक भी समाज और परिवार का हिस्सा हैं. इसलिए उनके धार्मिक और पारिवारिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रशासनिक निर्णय लेते समय कर्तव्य पालन के साथ मानवीय संवेदनाओं और धार्मिक-पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन भी जरूरी है.
झारोटेफ जिलाध्यक्ष ने कहा कि गढ़वा के उपायुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने स्वविवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए पत्र में अंकित तिथि में संशोधन कर सकते हैं. उन्होंने विभाग से तत्काल इस आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की.
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक अवकाश के दिन शिक्षकों से विभागीय कार्य लिए जाने पर क्षतिपूर्ति अवकाश स्वीकृत कराने के लिए शिक्षकों को बाद में अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. विभाग की ओर से क्षतिपूर्ति अवकाश स्वतः स्वीकृत नहीं किया जाता. उन्होंने अधिकारियों से शिक्षकों की इस व्यावहारिक परेशानी पर संवेदनशीलता से विचार करने की मांग की.
