स्कूल के रास्ते को लेकर सड़क पर उतरे छात्र: तीन घंटे तक बांदु-चुतरू मार्ग जाम, वाहनों की लगी लंबी कतार

गढ़वा के रंका में स्कूल जाने का रास्ता बंद होने से छात्रों ने बांदु-चुतरू मार्ग पर तीन घंटे तक चक्का जाम किया. प्रशासन ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन.

नंद कुमार

रंका (गढ़वा) : रंका प्रखंड के बांदु-चुतरू उत्क्रमित प्लस टू उर्दू उच्च विद्यालय में आने-जाने का रास्ता नहीं होने से आक्रोशित छात्र-छात्राओं का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा. विद्यार्थियों ने बांदु-चुतरू मार्ग पर उतरकर करीब तीन घंटे तक चक्का जाम कर दिया. इसके कारण रंका-रामानुजगंज मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गयी और परिचालन पूरी तरह ठप रहा. इस दौरान आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. चक्का जाम की सूचना मिलते ही अनुमंडल पदाधिकारी मो परवेज, अंचल अधिकारी शिवपूजन तिवारी और एसआइ मो सफीउल्लाह अंसारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने विद्यार्थियों को जल्द रास्ता खुलवाने का ठोस आश्वासन देकर जाम समाप्त कराया, जिसके बाद वाहनों का परिचालन दोबारा शुरू हो सका.

पगडंडी रास्ता भी हुआ बंद, उबड़-खाबड़ रास्ते से जाने को मजबूर हैं बच्चे

आक्रोशित विद्यार्थियों का कहना है कि विद्यालय तक आने-जाने का कोई स्थायी रास्ता नहीं है. वे लोग लंबे समय से खेतों की आरी-क्यारी और पगडंडी के सहारे स्कूल आते-जाते रहे हैं. लेकिन अब उस पगडंडी वाले रास्ते को भी रैयतदारों (जमीन मालिकों) ने खेत जोत-कोड़कर और कांटों से घेरकर पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके कारण छात्र-छात्राओं को बेहद उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जैसे-तैसे स्कूल पहुंचना पड़ रहा है, जिससे हर दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

एसडीओ ने किया निरीक्षण, कहा- रैयती जमीन पर न जाएं

मामला तूल पकड़ने पर एसडीओ मो परवेज ने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और रैयतों, दोनों पक्षों से बात कर भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है. एसडीओ ने स्पष्ट किया कि जिस पगडंडी से बच्चे जाते थे, वह पूरी तरह रैयती भूमि है. उन्होंने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे आज से उस रैयती रास्ते का उपयोग न करें. ग्रामीणों की मांग पर एसडीओ ने सीओ शिवपूजन तिवारी को निर्देश दिया कि वे तत्काल सरकारी सर्वे वाली भूमि की मापी कराकर स्कूल के लिए रास्ता चिह्नित करें.

सर्वे के रास्ते से बढ़ेगी 2 किमी की दूरी, बढ़ेगी शिक्षकों की परेशानी

मामले को लेकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार पासवान ने बताया कि वर्ष 2015 में उत्क्रमित उच्च विद्यालय का भवन मिडिल स्कूल से अलग बनकर तैयार हुआ था. पिछले दो वर्षों से इसे उत्क्रमित प्लस टू उर्दू उच्च विद्यालय का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन आज तक यहां पहुंचने का कोई सरकारी रास्ता नहीं बन सका. उन्होंने एक बड़ी व्यावहारिक दिक्कत की ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि सरकारी सर्वे वाले रास्ते से सड़क बनाई जाती है, तो स्कूल की दूरी करीब दो किलोमीटर बढ़ जाएगी. चूंकि प्लस टू विद्यालय के शिक्षक मध्य विद्यालय में भी पढ़ाने जाते हैं, इसलिए दूरी बढ़ने से दोनों विद्यालयों के संचालन में काफी परेशानी आएगी.

जल्द समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

इधर, स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी एसडीओ मो परवेज से मिलकर विद्यालय की जमीन और रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है. वहीं, छात्रों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे. इस मौके पर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मो नईमुद्दीन अंसारी, शिक्षक मो परवेज, ग्रामीण अकबर अंसारी, रियाजुद्दीन अंसारी, डॉ. रहबर अंसारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.


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