प्रतिनिधि, हरिहरपुर हरिहरपुर स्थित राजकीयकृत शंकर प्रताप देव उच्च विद्यालय आजादी के कई दशक बाद भी चारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधा से जूझ रहा है. वर्ष 1958 में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से चंदा इकट्ठा कर मिट्टी एवं खपरैल से बने भवन में इस विद्यालय की शुरुआत की गयी थी. उस समय शिक्षा के प्रति जागरूक ग्रामीणों ने अपने स्तर से पहल कर बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस विद्यालय का संचालन शुरू कराया था. बाद में इस विद्यालय को स्थायी रूप से सरकारी मान्यता दिलाने के लिए क्षेत्र के लोगों ने प्रयास किया. तत्कालीन भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वर्गीय भैया शंकर प्रताप देव के प्रयास से विद्यालय को बिहार सरकार से मान्यता प्राप्त हुई और उनके योगदान के सम्मान में विद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा गया. वर्तमान समय में यह विद्यालय लगभग बारह गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. हरिहरपुर सहित आसपास के कई गांवों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा प्राप्त करने आते हैं. इसके बावजूद इतने महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान में आज तक चारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे विद्यालय की सुरक्षा और अनुशासन प्रभावित हो रहा है. स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि चारदीवारी का निर्माण अत्यंत आवश्यक है. उनका मानना है कि इससे विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और पढ़ाई का माहौल सुधरेगा. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द विद्यालय के चारों ओर चारदीवारी निर्माण कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
चारदीवारी के अभाव में जूझ रहा शंकर प्रताप देव उच्च विद्यालय
चारदीवारी के अभाव में जूझ रहा शंकर प्रताप देव उच्च विद्यालय
