एसडीएम ने दुलदुलवा मध्य विद्यालय जाकर बच्चों को पढ़ाया

एसडीएम ने दुलदुलवा मध्य विद्यालय जाकर बच्चों को पढ़ाया

गढ़वा.

सदर एसडीएम संजय कुमार ने गुरुवार को मध्य विद्यालय दुलदुलवा का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने शिक्षकों तथा छात्रों की उपस्थिति, ड्रॉप आउट की स्थिति, आधारभूत साधनों की उपलब्धता आदि के बारे में जानकारी लेते हुए प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में ईमानदारी से काम करने तथा नियमित कक्षाएं संचालित करने का निदेश दिया. एसडीएम के साथ प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी रंभा चौबे और विद्यालय के शिक्षक गण मौजूद थे. इस दौरान एसडीएम ने कक्षा आठवीं और कक्षा सातवीं के बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाते हुए अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया.

शराब के दुष्प्रभाव पर बच्चों से निबंध लिखवाया गयाएसडीएम ने साचवीं व आठवीं कक्षा के बच्चों को एक साथ बैठाकर शराब के दुष्प्रभाव विषय पर निबंध लिखने को कहा. सभी बच्चों ने 100 शब्दों के अंदर शराब और अन्य नशे के दुष्प्रभावों के बारे में लिखा. सर्वश्रेष्ठ दो निबंध के लिए एसडीएम ने दो बच्चों को नकद राशि देकर पुरस्कृत किया.

गांव की साक्षरता दर बढ़ाने की जरूरतवर्ष 2011 के जनगणना आंकड़ों के अनुसार 2011 में दुलदुलवा गांव में कुल 910 परिवार थे, लगभग 5000 की तत्कालीन जनसंख्या की साक्षरता दर 61.80 प्रतिशत थी. जो कि राज्य की साक्षरता दर यानि 66.41 प्रतिशत से पांच प्रतिशत कम है. गांव की महिला साक्षरता लगभग 50 प्रतिशत हैं. मिली जानकारी के अनुसार अब तक गांव के ज्यादातर परिवार अवैध देशी शराब निर्माण में लगे रहे हैं. इससे बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. अब शराब निर्माण के कारोबार में रोक लगने से प्रभावी रोक लगने से यहां की साक्षरता दर बेहतर होने की उम्मीद है. संजय कुमार ने न केवल प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को बल्कि गांव के अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर देंकुल 350 में से 250 बच्चे थे अनुपस्थित : एसडीएम के स्कूल भ्रमण में लगभग 70 प्रतिशत बच्चे अनुपस्थित पाये गये. विद्यालय में कुल 350 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. वहीं मौके पर 100 छात्र-छात्राएं उपस्थित मिले. इनमें से ज्यादातर को एसडीएम के भ्रमण के मद्देनजर गांव से तात्कालिक रूप से बुला लिया गया था. शिक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे बच्चों के पठन-पाठन में गुणवत्तापूर्ण योगदान दें, ताकि बच्चे कम से कम अनुपस्थित रहें.

बच्चों के साथ भोजन करने बैठे एसडीएमनिरीक्षण के थोड़ी देर बाद ही मध्याह्न भोजन का समय हो गया था. भोजन की गुणवत्ता जांचने के उद्देश्य से एसडीएम ने सभी बच्चों के साथ खुद भी भोजन किया. भोजन की गुणवत्ता से उन्होंने संतुष्टि व्यक्ति की.

बच्चों को वितरित किए गये बैगइस दौरान सभी बच्चों को स्कूली बैग दिया गया. एसडीएम तथा बीइइओ ने संयुक्त रूप से बच्चों को बैग दिया. एसडीएम में कहा कि सभी बच्चों के खातों में नियमानुसार ड्रेस की राशि ससमय हस्तांतरित करना सुनिश्चित करेंगे. साइकिल वितरण एवं छात्रवृत्ति आदि के बारे में भी ससमय कार्रवाई करने को कहा गया.

सुप्रिया कुमारी एवं सोनपरी की कहानी ने सबको भावुक कर दियाकक्षा चार में पढ़ने वाली दो सगी बहनें सुप्रिया कुमारी एवं सोनपरी ने जब एसडीएम को अपनी दर्द भरी दास्तां सुनायी, तो सभी की आंखें नम हो गयी. सुप्रिया ने बताया कि उनके पिता पिंटू साव का निधन अधिक शराब पीने के कारण लगभग 6 साल पहले हो गया था. इसके बाद उनके दादा उनको पाल रहे थे. तभी उनकी मां ने अन्यत्र कहीं शादी कर ली. उसके बाद दादा जी और उनके चाचा का भी निधन हो गया. अब दोनों बहनों की देखभाल नाना कर रहे हैं. 10 साल की सुप्रिया और 8 साल की सोनपरी ने एसडीएम से बड़े भावुक अंदाज में कहा कि सर शराब पर रोक लगनी चाहिए ताकि उनकी तरह और बच्चे अनाथ न हों. संजय कुमार ने उन बच्चों को गले लगाते हुए कहा कि वे अनाथ नहीं है उनकी देखभाल की चिंता करने के लिए बहुत लोग हैं. वे पढ़ाई करें उन्हें किसी प्रकार की कमी नहीं होनेे दी जायेगी.

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