प्रकृति, प्रगति व मानव जीवन के अटूट संबंधों का उत्सव है सरहुल : एसडीएम

प्रकृति, प्रगति व मानव जीवन के अटूट संबंधों का उत्सव है सरहुल : एसडीएम

प्रतिनिधि, गढ़वा सरहुल के पावन अवसर पर आदिवासी सरना विकास परिषद द्वारा आयोजित पूजन व सांस्कृतिक कार्यक्रम में सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने शामिल हुए. उन्होंने इस दौरान पाहन एवं अन्य गणमान्य लोगों के साथ पारंपरिक विधि-विधान से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यक्रम के दौरान नगाड़ों व मांदर की थाप ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया. इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी भी पारंपरिक सरहुल नृत्य में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि पर्व त्योहारों में इस प्रकार की घनिष्ठ सहभागिता के भाव से जनसमुदाय के साथ प्रशासनिक जुड़ाव बढ़ता है. इस दौरान उन्होंने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर आदिवासी समाज की परंपराओं के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व का जीवंत प्रतीक है. यह पर्व प्राकृतिक नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, जो नये जीवन, नयी ऊर्जा और सकारात्मक शुरुआत का संदेश देता है. उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश देता आया है और सरहुल उसी परंपरा का उत्सव है. आज के बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है. प्रकृति संरक्षण और सतत विकास का दिया संदेश अनुमंडल पदाधिकारी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना चाहिए. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है. कार्यक्रम में गढ़वा एवं आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों, जैसे बड़गढ़, भंडरिया एवं छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >