आपन सरस्वतिया पूर समाज का अभियान : एसडीएम

आपन सरस्वतिया पूर समाज का अभियान : एसडीएम

प्रतिनिधि, गढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम कॉफी विद एसडीएम में बुधवार को सामाजिक व गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के संचालकों ने भाग लिया. कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण व सामुदायिक विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले संगठन के संचालक उपस्थित थे. इस दौरान संगठनों के संचालक से सरस्वतिया नदी की सफाई व संरक्षण को लेकर चर्चा की. प्रतिभागियों ने अभियान को लेकर अपने अनुभव, सुझाव एवं प्रतिक्रियाएं साझा कीं. कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे जनभागीदारी पर आधारित एक सकारात्मक पहल बताते हुए इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर अपने विचार रखे. एसडीएम ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा कि आपन सरस्वतिया केवल प्रशासन का अभियान नहीं, बल्कि पूरे समाज का अभियान है. समाज के विभिन्न वर्गों, संस्थाओं एवं स्वयंसेवकों के सहयोग से ही नदी को स्वच्छ, अतिक्रमण मुक्त एवं पुनर्जीवित बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा. संवाद के दौरान लायंस क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कंचन साहू, नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रतिनिधि संतोष केसरी, पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंहा, कन्या विवाह सोसाइटी के सचिव विकास माली, डॉ मोती चंद्र, विश्वनाथ अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, जनक विकास धारा के संयोजक अमरेंद्र कुमार, लायंस क्लब गढ़वा सिटी के अध्यक्ष आरएन प्रसाद, अवार्ड संस्था के प्रतिनिधि सुरेंद्र कुमार दुबे, विकास भारती के प्रतिनिधि राकेश पाठक, वीमेन डेवलपमेंट फाऊंडेशन की संयोजिका चंपा देवी, चेतना वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष आर्यन गर्ग, झारखंड फिल्म निर्माता संघ के जिला अध्यक्ष दयाशंकर गुप्ता आदि उपस्थित थे. बुद्धिजीवियों व समाज सेवियों ने दिये महत्वपूर्ण सुझाव संवाद के दौरान उपस्थित लोगों ने नदी संरक्षण, स्वच्छता जागरूकता, जनसहभागिता बढ़ाने, नदी किनारे अतिक्रमण रोकने तथा अभियान को और व्यापक बनाने से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये. प्रतिभागियों ने कहा कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से ही नदी संरक्षण जैसे अभियानों को स्थायी सफलता मिल सकती है. नदी के किनारे पीपल के पेड़ लगाने, पुलों के पास जाली लगाने, जन जागरूकता चलाने, सीएसआर फंड की मदद लेने, नदी किनारे सीसीटीवी अधिष्ठापन, मिनी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने, नदी को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर जिम्मेदारी सौंपने जैसे कई सुझाव दिये. कई लोगों ने सहयोग का बढ़ाया हाथ संवाद कार्यक्रम में उपस्थित कई संगठनों ने संचालकों ने अभियान में प्रत्यक्ष सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की. कुछ लोगों ने नदी सफाई व अतिक्रमण मुक्ति अभियान के लिए जेसीबी मशीन उपलब्ध कराने की पेशकश की, जबकि अन्य लोगों ने जनजागरूकता एवं श्रमदान के माध्यम से सहयोग देने का भरोसा दिया.

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Author: Akarsh Aniket

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