रंका में कनहर और खरसोइया नदी के घाटों से रोजाना 50-60 ट्रैक्टरों से हो रही ढुलाई रेकी के जरिये पुलिस को चकमा दे रहे माफिया नंद कुमार रंका (गढ़वा). अनुमंडल क्षेत्र में इन दिनों अवैध बालू का कारोबार चरम पर है. प्रशासन के दावों के विपरीत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि क्षेत्र में रात ढलते ही बालू का अवैध खनन और परिवहन जोरों से शुरू हो जाता है. प्रतिदिन रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक एनएच 343 पर बालू लदे ट्रैक्टरों का तांता लगा रहता है, जिसकी आवाज से स्थानीय लोग रतजगा करने को मजबूर हैं. हैरानी की बात यह है कि रंका में एक भी अधिकृत बालू घाट नहीं है, इसके बावजूद हर रात करीब 50 से 60 ट्रैक्टरों से बालू का अवैध उठाव धड़ल्ले से किया जा रहा है. माफियाओं द्वारा कनहर नदी के जनेवा, भंवरी, अनहर और बाराडीह बालू घाट समेत खरसोइया नदी के बालू घाट से बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है. ट्रैक्टरों के आगे-पीछे बाइक सवार युवक तैनात रहते हैं पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए बालू माफियाओं ने बाकायदा रेकी की व्यवस्था कर रखी है. ट्रैक्टरों के आगे-पीछे बाइक सवार युवक तैनात रहते हैं, जो प्रशासन की हर गतिविधि की पल-पल की रिपोर्ट माफियाओं तक पहुंचाते हैं.इस अवैध धंधे के कारण बालू की कीमतें आसमान छू रही हैं.माफियाओं ने रंका अनुमंडल मुख्यालय के आस-पास के क्षेत्रों में अवैध डंपिंग यार्ड बना लिए हैं, जहां से 5,000 रुपये प्रति ट्रैक्टर की दर से बालू बेचा जा रहा है. इसका सीधा असर प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना के लाभुकों पर पड़ रहा है. बालू की अत्यधिक कीमत के कारण गरीब तबके के लोग अपना आशियाना पूरा करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, जिससे कई आवास अधूरे पड़े हैं. माफिया मालामाल, सरकार को लग रहा चूना जानकारों के मुताबिक, कनहर और खरसोइया नदी से हर महीने करीब करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के बालू का अवैध कारोबार हो रहा है. सरकारी दर से कई गुना अधिक दामों पर बालू बेचे जाने के कारण जहां एक ओर माफिया मालामाल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को हर महीने भारी मात्रा में राजस्व का चूना लग रहा है. स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार और जिला प्रशासन इस अवैध कारोबार पर पूर्णतः रोक लगायें और आम जनता को रियायती दरों पर बालू उपलब्ध कराये. कोट…रंका क्षेत्र में अवैध रूप से बालू के उठाव और परिवहन की शिकायत मिली है. यह गंभीर मामला है. मामले को संज्ञान में लेते हुए टास्क फोर्स के जरिए जल्द ही चिन्हित घाटों और डंपिंग स्थलों पर छापेमारी की जाएगी और संलिप्त कारोबारियों के खिलाफ त्वरित व सख्त कानूनी कार्रवाई होगी. राजेंद्र उरांव, जिला खनन पदाधिकारी
रात ढलते ही शुरू होता है अवैध बालू का खेल, हर महीने करोड़ों की राजस्व क्षति
अनुमंडल क्षेत्र में इन दिनों अवैध बालू का कारोबार चरम पर है.
