अध्यक्ष पद अनारक्षित होने से गढ़वा मेंं बदले सियासी समीकरण

अध्यक्ष पद अनारक्षित होने से गढ़वा मेंं बदले सियासी समीकरण

By Akarsh Aniket | January 14, 2026 9:15 PM

नगर निकाय चुनाव में 18 साल का हिसाब मांगेगे गढ़वा के मतदाता जितेंद्र सिंह, गढ़वा गढ़वा नगर परिषद एक बार फिर चुनावी मोड़ पर खड़ा है. वर्ष 2007 में नगर पंचायत बनने के बाद से अब तक शहर ने तीन कार्यकाल देखे हैं, लेकिन अपेक्षित विकास आज भी अधूरा है. फरवरी 2026 में संभावित नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है. इस बार चुनाव का सबसे बड़ा और निर्णायक मुद्दा नगर परिषद अध्यक्ष पद का अनारक्षित (अन्य) किया जाना है, जिसने स्थानीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल दिये हैं. चुनाव की घोषणा होने से पहले ही कई दावेदार की चर्चाएं तेज हो गयीं है. बड़ी संख्या में पुरुष दवावेदारी पेश कर रहे हैं. गढ़वा को 2007 में नगर पंचायत और 2013 में नगर परिषद का दर्जा मिला. आम नागरिकों ने बेहतर सड़क, जलापूर्ति, नाली, कचरा प्रबंधन और सुव्यवस्थित शहर के सपने देखे थे. नगर विकास विभाग से करोड़ों रुपये आये, योजनाएं बनीं और फाइलें चलीं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव सीमित ही रहा. बीते तीन कार्यकालों में नगर परिषद विकास से अधिक घोटालों, आरोप-प्रत्यारोप और आपसी खींचतान को लेकर चर्चा में रही. परिणामस्वरूप गढ़वा आज भी वादों और हकीकत के बीच झूलता नजर आता है. सियासत में नयी हलचल करीब डेढ़ दशक बाद इस बार नगर परिषद अध्यक्ष पद को अनारक्षित (अन्य वर्ग) कर दिया गया है. यही फैसला चुनाव की धुरी बन गया है. अब तक पर्दे के पीछे तैयारी कर रहे कई दावेदार खुलकर सामने आने लगे हैं. वर्षों से दबे पुरुष उम्मीदवारों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा अब पूरी ताकत के साथ उभर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संकेतों के बाद राजनीतिक दल और कार्यकर्ता भी पूरी सक्रियता के मूड में हैं. चौक-चौराहों से चाय दुकानों तक चुनावी चर्चा चुनाव की आहट के साथ ही गढ़वा के चौक-चौराहों, चाय दुकानों और मोहल्लों में एक ही सवाल गूंज रहा है. इस बार अध्यक्ष कौन बनेगा? क्या जनता पुराने चेहरों पर फिर भरोसा करेगी या किसी नये, साफ छवि वाले प्रत्याशी को मौका देगी? राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गये हैं. कुछ उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं, तो कई सही समय के इंतजार में हैं. कचरा और ड्रेनेज व्यवस्था कटघरे में नगर परिषद के गठन के 18 वर्ष बाद भी ठोस कचरा प्रबंधन और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम का न होना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों पर बड़ा सवाल है. हर चुनाव में यह मुद्दा उठता रहा, घोषणाएं होती रहीं, लेकिन धरातल पर बदलाव नहीं दिखा. इस बार मतदाता सीधे सवाल कर रहे हैं कि जब 18 साल में कचरा और नाली की व्यवस्था नहीं हो सकी, तो आगे भरोसा कैसे किया जाये? इसके साथ ही जलापूर्ति, जर्जर सड़कें और वार्डों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी प्रत्याशियों के लिए बड़ी चुनौती होगी. लंबी हो रही दावेदारों की सूचीफरवरी 2026 में होने वाले चुनाव को लेकर दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है. कई प्रमुख नामों की चर्चाएं हो रही हैं, जिनमें निवर्तमान अध्यक्ष पिंकी केसरी या उनके पति संतोष केसरी, पूर्व नगर अध्यक्ष अनीता दत्त, विकास माली, दौलत सोनी, ज्योति प्रकाश केसरी, पूर्व उपाध्यक्ष अलखनाथ पांडेय, चंदन जायसवाल, प्रियम सिंह आदि शामिल हैं. एक नजर में गढ़व नगर परिषद 1993 गढ़वा जिला बना 2007 : नगर पंचायत का दर्जा 2013 : नगर परिषद बना 2007–2019 : तीन चुनाव संपन्न फरवरी 2026 : चौथा नगर परिषद चुनाव संभावित

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