गढ़वा: पावर प्लांट के बाद मिट्टी-मोरम बनी सियासी पिच

भवनाथपुर विधानसभा में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. 2024 में अनंत प्रताप देव का साथ देने वाले दीपक प्रताप देव अब उनके खिलाफ अपनी अलग राह बना रहे हैं. दोनों की ग्रामीण इलाकों में सक्रियता से सियासत और दिलचस्प हो गई है.

गढ़वाः भवनाथपुर विधानसभा की सियासत में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. वर्ष 2024 में जिस राजनीतिक साथ के सहारे अनंत प्रताप देव ने भानु प्रताप शाही की लगातार जीत की हैट्रिक रोकने में सफलता हासिल की थी, उसी खेमे के अहम खिलाड़ी दीपक प्रताप देव अब अनंत के खिलाफ अलग राजनीतिक जमीन तैयार करते नजर आ रहे हैं. कभी अनंत के साथ चुनावी मैदान में खड़े रहने वाले दीपक जुलाई में बगावत का रास्ता पकड़ने के बाद गांव-गांव अपनी अलग पहचान बनाने में जुटे हैं.

इस बदलाव के बाद भवनाथपुर की सियासत अब सिर्फ भानु प्रताप शाही बनाम अनंत प्रताप देव तक सीमित नहीं रह गई है. राजनीतिक मैदान में अनंत और दीपक के बीच भी नया मुकाबला उभरता दिख रहा है. दोनों नेताओं की ग्रामीण इलाकों में बढ़ती सक्रियता ने क्षेत्र की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है.

2024 में भानु की हैट्रिक रोकने के लिए बनी थी राजनीतिक तिकड़ी

वर्ष 2024 का विधानसभा चुनाव भवनाथपुर की राजनीति में बड़े उलटफेर के तौर पर सामने आया था. लगातार दो चुनाव जीत चुके भानु प्रताप शाही की जीत की हैट्रिक रोकने के लिए ऐसा राजनीतिक समीकरण बना, जिसकी उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की थी. अनंत प्रताप देव और दीपक प्रताप देव की जोड़ी पहले से साथ थी. तत्कालीन मंत्री मिथिलेश ठाकुर की सक्रिय पहल से ताहिर अंसारी भी इस राजनीतिक समीकरण में शामिल हुए. तीनों की यह तिकड़ी चुनावी मैदान में उतरी और परिणाम भानु प्रताप शाही की जीत की हैट्रिक टूटने के रूप में सामने आया. उस चुनाव में दीपक, अनंत के साथ मजबूती से खड़े थे. दोनों एक-दूसरे की राजनीतिक ताकत बने हुए थे. लेकिन करीब दो साल के भीतर ही यह राजनीतिक तस्वीर बदल गई.

ये भी पढ़ें- अब विदेशों में बिकेंगे झारखंड के जैविक और प्राकृतिक उत्पाद, केंद्र सरकार ने तैयार किया नया प्लान

जो साथ दौड़ा, वही अब विकेट गिराने की तैयारी में

जुलाई में दीपक प्रताप देव ने अनंत प्रताप देव के खिलाफ बगावत का रास्ता पकड़ लिया. इसके बाद दोनों के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बढ़ती गई. अब दीपक अपने स्तर से गांव-गांव में सक्रिय होकर अलग राजनीतिक पहचान बनाने में जुटे हैं. रमना प्रखंड के मझिगावां में मझिगावां फुलवारी से मझिगावां गांव होते हुए कोरगा सेयान तक मिट्टी-मोरम सड़क निर्माण का काम दीपक के स्तर से शुरू कराया गया है. दीपक ने इसकी जानकारी देते हुए ‘सेवा और संघर्ष जारी’ का संदेश दिया है. सियासी नजरिए से देखें तो यह सिर्फ सड़क पर मिट्टी-मोरम डालने का काम नहीं है. इसे दीपक की नई राजनीतिक पारी के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है. ग्रामीण स्तर पर काम के जरिए वह अनंत से अलग अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं.

अनंत भी ग्रामीण सड़कों के मुद्दे पर सक्रिय

दीपक की बढ़ती सक्रियता के बीच विधायक अनंत प्रताप देव भी ग्रामीण इलाकों में एक्शन में दिख रहे हैं. श्री बंशीधर नगर-सगमा क्षेत्र में झुनका से घघरी तक करीब पांच किलोमीटर सड़क की मिट्टी-मोरम से मरम्मत का काम उनके निर्देश और सहयोग से शुरू कराया गया है. झामुमो नेता डॉ. हरिदास यादव के अनुसार, ग्रामीणों ने सड़क की जर्जर स्थिति की शिकायत विधायक से की थी. इसके बाद विधायक ने तत्काल मिट्टी-मोरम डालकर सड़क की मरम्मत कराने का निर्देश दिया. डॉ. यादव ने कहा कि सड़क के स्थायी निर्माण के लिए भी विधायक प्रयासरत हैं. यानी जिस राजनीतिक मैदान में दीपक देव ने मिट्टी-मोरम के काम के जरिए अपनी नई पारी की शुरुआत की, उसी मुद्दे पर अब अनंत भी सक्रिय हो गए हैं. यह महज संयोग है या राजनीतिक जवाब, लेकिन दोनों नेताओं की गतिविधियों ने भवनाथपुर की सियासत को जरूर गरमा दिया है.

ये भी पढ़ें- झारखंड में उर्दू शिक्षकों के 7232 पद खाली, बहाली का इंतजार करते बीते दो साल

भानु ने पावर प्लांट के बाद मिट्टी-मोरम को बनाया निशाना

अनंत और दीपक की बढ़ती सक्रियता ने पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही को भी विधायक पर हमला करने का नया मौका दे दिया है. पावर प्लांट के मुद्दे पर पहले से अनंत को घेर रहे भानु ने अब मिट्टी-मोरम वाली सड़कों को लेकर भी तंज कसा है. उन्होंने कहा, “वादा था पावर प्लांट लगाने का, पलायन रोकने का. जीतने के बाद मिट्टी-मोरम पर ताल ठोक रहे हैं बाप-बेटा. वाह रे राजा + राजकुमार.”

भानु प्रताप शाही लंबे समय से पावर प्लांट के मुद्दे पर अनंत प्रताप देव को घेरते रहे हैं. चुनाव के बाद अनंत की ओर से छह माह के भीतर पावर प्लांट की स्थापना की बात कही गई थी. लेकिन अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं होने का सवाल भानु लगातार उठाते रहे हैं.

पावर प्लांट के बाद सड़क भी बनी सियासी मुद्दा

भवनाथपुर में 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद से राजनीतिक मुकाबला लगातार दिलचस्प होता गया है. पहले पावर प्लांट और रोजगार का मुद्दा प्रमुख था. अब गांव की सड़क और चापानल जैसे स्थानीय मुद्दे भी राजनीतिक ताकत दिखाने का माध्यम बनते नजर आ रहे हैं. एक तरफ भानु प्रताप शाही पावर प्लांट के सवाल पर अनंत को घेर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अनंत और दीपक अलग-अलग स्तर पर ग्रामीण जरूरतों से जुड़े मुद्दों को लेकर मैदान में उतरते दिख रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि अब अनंत और दीपक एक ही राजनीतिक टीम का हिस्सा नहीं हैं.

2024 में भानु को क्लीन बोल्ड करने के लिए जिस टीम ने साथ खेला था, उसमें अब दरार साफ दिखाई दे रही है. जो खिलाड़ी कभी अनंत की जीत के लिए रन बना रहा था, वही अब उनके खिलाफ राजनीतिक रन आउट की रणनीति बनाता दिख रहा है. भवनाथपुर की सियासी पिच पर आगे कौन किसे आउट करता है, यह आने वाला वक्त बताएगा. फिलहाल इतना तय है कि पावर प्लांट के बाद मिट्टी-मोरम की सड़कें भी राजनीतिक मैच का हिस्सा बन गई हैं और इस बदलते समीकरण ने भवनाथपुर की सियासत को पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प बना दिया है.

ये भी पढ़ें- JPSC, CGL समेत चार भर्ती परीक्षाओं पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई, हजारों अभ्यर्थियों की टिकी निगाहें

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >