गढ़वा : जिले की शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही अब भारी पड़ेगी. काम में ढिलाई और लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई की जायेगी. सोमवार को समाहरणालय सभागार में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि उपलब्धियां सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि विद्यालयों में भी दिखनी चाहिए. निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों की जवाबदेही तय की जायेगी और जरूरत पड़ने पर वेतन भी रोका जायेगा.
बैठक में उपायुक्त ने शिक्षा विभाग के प्रमुख इंडिकेटरों की बारी-बारी से समीक्षा की. जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक से लेकर बीईईओ, बीपीओ-बीपीएम, बीआरपी-सीआरपी और एमआईएस को-ऑर्डिनेटर्स से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गयी. कई मामलों में अपेक्षित उपलब्धि नहीं मिलने पर उपायुक्त ने नाराजगी जतायी और अगली समीक्षा तक प्रदर्शन में ठोस सुधार लाने का निर्देश दिया.
छात्र उपस्थिति में पिछड़े प्रखंडों पर कार्रवाई
छात्र उपस्थिति की समीक्षा में चिनियां और केतार प्रखंड का प्रदर्शन खराब पाया गया. इस पर दोनों प्रखंडों के बीपीओ से स्पष्टीकरण मांगने के साथ वेतन रोकने का निर्देश दिया गया. सगमा के बीपीओ से भी खराब प्रदर्शन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है.
वहीं आपार आधार और एमबीयू से संबंधित कार्यों में 60 प्रतिशत से कम उपलब्धि वाले प्रखंडों के एमआईएस को-ऑर्डिनेटर्स से भी स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने कहा कि निर्धारित इंडिकेटरों की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए. अगली समीक्षा में सुधार नहीं दिखा, तो कार्रवाई की जायेगी.
स्कूल निरीक्षण से शिक्षकों की हाजिरी तक होगी निगरानी
उपायुक्त ने सभी बीईईओ, बीपीओ-बीपीएम, बीआरपी और सीआरपी को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया. जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों व कर्मियों की उपस्थिति की नियमित समीक्षा करने को कहा गया.
मासिक परिलब्धि का भुगतान दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही करने का निर्देश दिया गया है. जिन विद्यालयों का प्रदर्शन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलेगा, वहां प्रधानाध्यापक और संबंधित शिक्षकों की जवाबदेही तय की जायेगी. लक्ष्य और मानकों में अपेक्षित सुधार के बाद ही वेतन भुगतान की स्वीकृति देने की बात कही गयी.
बैठक में छात्र-शिक्षक उपस्थिति, आधार व बायोमेट्रिक अपडेट, आधारभूत संरचना, निपुण भारत मिशन, पीएम-श्री विद्यालय, पलाश कार्यक्रम, पीएम पोषण, आईसीटी और स्मार्ट क्लास, स्वास्थ्य जांच, आयरन-फोलिक एसिड वितरण, सीपीडी प्रशिक्षण, प्रोजेक्ट रेल के तहत मासिक मूल्यांकन, यू-डायस, एसएमएस रिपोर्टिंग, एनआईएलपी-उल्लास, न्यायालय से जुड़े लंबित मामलों और समग्र शिक्षा के लंबित अग्रिमों की समीक्षा की गयी.
उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बच्चों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यालयों के प्रदर्शन में इसका सीधा असर दिखना चाहिए. उन्होंने लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने का भी निर्देश दिया.
पीएम पोषण योजना में भी सख्ती
पीएम पोषण योजना की समीक्षा के दौरान विद्यालयों से एसएमएस के जरिये मध्याह्न भोजन संचालन की सूचना, प्रखंडवार खाद्यान्न वितरण, ऑनलाइन डाटा एंट्री, प्रखंड स्तरीय स्टीयरिंग-सह-मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक और किचेन-सह-स्टोर की मरम्मत की स्थिति की जानकारी ली गयी.
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि बच्चों को मेनू के अनुसार पौष्टिक और पूरक आहार मिलना चाहिए. पीएम पोषण योजना में किसी भी तरह की अनियमितता अथवा लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जायेगी. कमजोर प्रदर्शन वाले प्रखंडों और विद्यालयों को शीघ्र निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया गया.
